भास्कर संवाददाता | खरगोन कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है, इसे जिले के रायबिड़पुरा गांव के किसान बद्रीलाल पटेल ने सच कर दिखाया है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होने वाली सफेद मूसली की खेती में छिलका हटाने के लिए महंगी मजदूरी किसानों की बड़ी समस्या बन रही थी। इसी परेशानी का समाधान निकालते हुए बद्रीलाल ने जुगाड़ तकनीक से मूसली का छिलका हटाने की मशीन तैयार कर ली। किसान ने ड्रम, जाली, पतरा, मोटर और गियर बॉक्स की मदद से यह मशीन बनाई है, जो 10 से 15 मिनट में 40 किलो से अधिक मूसली साफ कर देती है। जबकि इतनी ही मात्रा की सफाई के लिए पहले 400 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चार से पांच मजदूरों की जरूरत पड़ती थी। इस मशीन से न सिर्फ समय की बचत हो रही है, बल्कि किसानों की लागत भी काफी कम हो गई है। मशीन की उपयोगिता देखकर आसपास के किसान भी इसका उपयोग करने लगे हैं। एमएसएमई के तहत किया शामिल किसान के इस नवाचार को प्रशासन ने भी सराहा है। अधिकारियों ने इस जुगाड़ मशीन को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के तहत शामिल किया है, ताकि बद्रीलाल को रोजगार का अवसर मिल सके। मशीन खरीदने वाले किसानों को शासन स्तर से सब्सिडी दिलाने की भी योजना है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ न पड़े।


