गुजरात में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा है, जिसमें राष्ट्रीय नेताओं से लेकर क्षेत्रीय नेता भी शामिल हैं। इसी दौरान रायपुर उत्तर के पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा के साथ एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला, जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें देखकर रुकते हुए “स्कूटर वाले सरदार जी” के रूप में पहचानते हुए उनसे बातचीत की। ये वाकया अधिवेशन के पहले दिन का है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे बाहर निकलकर होटल की तरफ रवाना हो रहे थे, उस वक्त मंच के पास खड़े नेताओं से दोनों नेता अभिवादन कर रहे थे। इसी दौरान विधायक कुलदीप जुनेजा ने भी दोनों नेताओं को नमस्कार किया। राहुल और खड़गे दोनों आगे बढ़ गए, लेकिन कुछ कदम चलने के बाद खड़गे अचानक रुके, पीछे लौटे और बोले – “आप तो स्कूटर वाले सरदार जी हैं।”इस पर वहां मौजूद नेता और कार्यकर्ता भी मुस्करा उठे। दरअसल, राहुल गांधी भी पहले जुनेजा को इसी नाम से संबोधित कर चुके हैं, जो उस वक्त भी इसकी चर्चा हुई। आज अधिवेशन का आखरी दिन अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आज कांग्रेस का 84वां राष्ट्रीय अधिवेशन का आखिरी दिन है। सुबह 9:30 बजे झंडावंदन के साथ आज के कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है और फिर AICC का प्लेनरी सेशन यानी पूरा अधिवेशन होगा। इस अधिवेशन की थीम है, ‘न्यायपथ: संकल्प, समर्पण, और संघर्ष।’ इसके इर्द-गिर्द कांग्रेस की पूरी पॉलिटिकल प्लानिंग बनाई गई है। आने वाले चुनावों की कैंपेनिंग भी इसी थीम को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की जाएगी। इस मौके पर देशभर से 1700 से ज्यादा एआईसीसी प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे बड़े नेता भी मौजूद है। अधिवेश में आज? क्या है न्यायपथ न्यायपथ’ का मतलब है। एक ऐसा रोडमैप जिसमें संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के हक़ को बचाने के लिए कांग्रेस अब खुलकर मैदान में उतरेगी। ये थीम सिर्फ गुजरात अधिवेशन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले सभी राज्यों के चुनाव और 2029 के लिए पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति की बुनियाद बनेगी। संकल्प – मतलब: BJP से सीधी भिड़ंत की तैयारी कांग्रेस ने अब ये तय कर लिया है कि वो BJP को सिर्फ चुनावी स्तर पर नहीं, विचारधारा के स्तर पर टक्कर देगी। यानी लोकतंत्र, संविधान, और अधिकारों की बात करके भाजपा की हिंदुत्व बनाम सेक्युलरिज़्म की बहस को पलटना है। प्लान है – संविधान बचाओ यात्रा जैसे मूवमेंट से जमीनी पकड़ बनाना और जनता को बताना कि असली मुद्दे क्या हैं। समर्पण – मतलब: संगठन को फिर से खड़ा करना इसका असली मतलब है – ब्लॉक से लेकर बूथ तक संगठन को एक्टिव करना और हर कार्यकर्ता की भागीदारी तय करना। अधिवेशन में जो 1700+ प्रतिनिधि आए हैं, उनमें से हर किसी को “मुद्दों की लड़ाई का सिपाही” बनाया जाएगा। टारगेट – राज्यों में होने वाले विधानसभा और 2029 चुनाव से पहले हर जिले में मुद्दों पर आंदोलन, जनसंवाद और विरोध प्रदर्शन की तैयारी। संघर्ष – मतलब: लड़ाई अब सिर्फ राहुल गांधी की नहीं इस बार कांग्रेस पूरे देश में राज्य स्तर की लीडरशिप को एक्टिव करने जा रही है।भूपेश बघेल, पायलट, सुरजेवाला, विक्रांत भूरिया जैसे लीडर्स को अलग-अलग ज़िम्मेदारियां दी जा रही हैं। पार्टी अब सिर्फ परिवार पर नहीं, ज़मीनी नेताओं पर दांव लगाने की तैयारी में है। साथ ही जिला अध्यक्षों को पावर देकर उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई जानी है। संविधान बचाओ यात्रा निकालेगी कांग्रेसकांग्रेस 3 दशक से गुजरात की सत्ता से बाहर है। ऐसे में पार्टी अब सिर्फ संगठन को नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में है। कांग्रेस का दावा है कि यह अधिवेशन “संविधान बचाओ यात्रा” की शुरुआत है, जो भाजपा की नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान बनेगी। छत्तीसगढ़ के नेताओं का रोल अधिवेशन में – ऐसे समझे


