नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अरावली की ऊंचाई 100 मीटर से कम करने और इसके संरक्षण को लेकर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री पर निशाना साधा है। जूली ने कहा- अरावली के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। अरावली को बचाने की लड़ाई अब किसी दल विशेष की नहीं, बल्कि प्रदेश के अस्तित्व और हमारी आने वाली पीढ़ियों की सांसों को बचाने का सामाजिक धर्म है। जूली ने कहा- यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है कि जिनके कंधों पर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी है। वही आज विनाश की पटकथा लिख रहे हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की शिक्षा अजमेर में हुई और वे अलवर का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों ही क्षेत्र अरावली की गोद में बसे हैं और पुष्कर जैसे तीर्थों की रक्षा करते हैं। जूली ने कहा- मंत्री ‘धृतराष्ट्र’ बनकर अरावली का विनाश देख रहे हैं। क्या उन्हें अपनी ही मिट्टी और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की चिंता नहीं है? अरावली की परिभाषा बदलकर 90% अरावली को नीलाम करने की तैयारी
जूली ने कहा- केंद्र के फॉरेस्ट एक्ट और अरावली की परिभाषा में किए गए मनमाने संशोधनों से राजस्थान के लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इसका सीधा अर्थ है- खनन माफिया के लिए रेड कारपेट बिछाना। यदि 11 हजार से अधिक पहाड़ियों वाला यह प्राकृतिक रक्षा कवच टूट गया तो थार के मरुस्थल को दिल्ली और पूर्वी राजस्थान तक पहुंचने से कोई नहीं रोक पाएगा। वर्ष 2023 के संशोधनों के जरिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) जैसी स्वतंत्र निगरानी संस्थाओं को कमजोर कर, उन्हें पूरी तरह पर्यावरण मंत्रालय के अधीन कर दिया गया है। स्वतंत्र आवाज को दबाकर सरकार अब अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मनमाने फैसले ले रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। राजनीतिक मतभेद भुलाकर अरावली बचाने एकजुट हों प्रदेशवासी
जूली ने कहा- अरावली हमारे लिए केवल पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है। यहां पांडुपोल हनुमानजी और राजा भर्तृहरि जैसे महान तीर्थ वास करते हैं। बुजुर्ग हमें हरे-भरे पहाड़ और कुएं सौंप कर गए थे, लेकिन आज हमारा लालच भू-जल को 1500 फीट नीचे ले गया है। अगर अब भी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। जूली ने कहा- यह लड़ाई अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी। अरावली बचाओ अभियान को जनआंदोलन बनाना होगा। प्रदेशवासियों से अपील है कि वे दलगत राजनीति और मतभेदों को भुलाकर अपनी प्रकृति, अपनी संस्कृति और अपनी सांसों की रक्षा के लिए एकजुट हों। हम सरकार को इन विनाशकारी संशोधनों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर देंगे। यह खबर भी पढ़ें… ‘अरावली आंधी को रोकती है, इसके बिना स्थिति डरावनी होगी:गहलोत पहाड़ी बचाने के अभियान से जुड़े, बोले- इसकी ऊंचाई फीते से नहीं नापें पूर्व सीएम अशोक गहलोत ‘अरावली बचाओ मुहिम’ के समर्थन में उतर गए हैं। गहलोत ने कहा- ये पहाड़ियां और यहां के जंगल एनसीआर और आस-पास के शहरों के लिए ‘फेफड़ों’ का काम करते हैं। ये धूल भरी आंधियों को रोकते हैं और प्रदूषण कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब अरावली के रहते हुए स्थिति इतनी गंभीर है तो अरावली के बिना स्थिति कितनी वीभत्स होगी, इसकी कल्पना भी डरावनी है। (पूरी खबर पढ़ें)


