जेएलएफ में अब मुगल टेंट में नहीं होगी चर्चा:लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ समेत राजनेताओं ने जताई थी नाराजगी, नया वेन्यू सूर्य महल बनाया

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में अब मुगल टेंट में साहित्यकारों के सेशन नहीं होंगे। दो साल से विवाद में रहे मुगल टेंट को इस बार फूड एरिया बना दिया गया है। वहीं, सेशन के लिए नया वेन्यू सूर्य महल बनाया गया है। मंगलवार को टीमवर्क्स आट्‌र्स के निदेशक और जेएलएफ के प्रोड्यूसर संजोय रॉय ने बताया- क्लार्क्स आमेर में नया वेन्यू हमें मिला था। इसे हमने सेशन के लिए चुना है। बारिश के कारण भी कई बार परेशानी होती थी। यह भी बदलाव का कारण रहा है। होटल क्लार्क्स आमेर में 30 जनवरी से 3 फरवरी तक जेएलएफ आयोजित होगा। इस बार की थीम उत्सव के तहत पूरे होटल परिसर को सजाया जाएगा। जेएलएफ में 250 से ज्यादा साहित्यकार हिस्सा लेंगे। जयपुर म्यूजिक स्टेज पर कैलाश खेर के कैलासा, अभिजीत पोहनकर के ‘द अमीर खुसरो प्रोजेक्ट’, दास्तान लाइव के ‘कबीरा खड़ा बाजार में’, कामाक्षी खन्ना, सुशीला रमन एवं सैम मिल्स, नाथू लाल सोलंकी, चुग्गे खान और ऋषि जैसे कलाकार व ग्रुप अपनी प्रस्तुति देंगे। लक्ष्यराज सिंह और सतीश पूनिया उठा चुके मुगल टेंट का मुद्दा
उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह ने 2023 में जेएलएफ में एक सेशन में मुगल टेंट का नाम रखे जाने पर आपत्ति जताई थी। लक्ष्यराज ने राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी के साथ एक सत्र में चर्चा की थी। इस दौरान लक्ष्यराज ने कहा था कि हम दोनों मेवाड़ से हैं। मुगल और मेवाड़ के बीच हमेशा दुश्मनी रही है। समय देखिए, इस नाम के साथ चर्चा करनी पड़ रही है। इसके बाद भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा था कि मुगल टेंट का नाम रखना आयोजकों की गलती है। इससे लोग नाखुश हैं। वहीं भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने मुगल टेंट का नाम बदलने की मांग करते हुए कहा था कि प्रदेशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। मुगल टेंट नाम रखे जाने से लोगों में नाराजगी है। कवि बद्री नारायण को कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार
फेस्टिवल में प्रतिष्ठित कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार इस बार हिंदी के प्रख्यात कवि बद्री नारायण को उनकी साहित्यिक प्रतिभा और समाज में परिवर्तन लाने वाली शैली के लिए दिया जाएगा। बद्री नारायण को उनके कविता संग्रह ‘तुमड़ी के शब्द’ के लिए 2022 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। वे अपनी गहरी समाजशास्त्रीय दृष्टि से सम्पन्न, लोकधर्मी और विचारोत्तेजक कविताओं के लिए जाने जाते हैं। ये चर्चित नाम करेंगे शिरकत
जेएलएफ में नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी, एस्थर डुफ्लो और वेंकी रामकृष्णन हिस्सा होंगे। अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री, पुलित्जर विजेता और साहित्यिक आलोचक स्टीफन ग्रीनब्लाट, इतिहासकार और विचारक गोपालकृष्ण गांधी, अनीता आनंद, मनु एस. पिल्लई और रंजीत होस्कोटे, थिएटर, सिनेमा और कला से जुड़े दिग्गज डेविड हेयर, जावेद अख्तर, इम्तियाज अली और मानव कौल भी इसका हिस्सा बनेंगे। इस बार नूपुर संस्थान के सहयोग से साइन लैंग्वेज और इंटरप्रिटेशन सेशंस भी होंगे। जो हर व्यक्ति तक साइन लैंग्वेज के जरिए विचारों को पहुंचाने में मददगार साबित होगा।

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