धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीआईटी) के छात्रों को रजिस्ट्रेशन और परीक्षा से वंचित रखने के मामले में सीबीआई ने झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) व एआईसीटीई के अफसरों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की टीम मंगलवार को नामकुम स्थित जेयूटी कैंपस पहुंची। जेयूटी के प्रभारी रजिस्ट्रार निशांत कुमार और अन्य अधिकारियों से डीआईटी में एफिलिएशन को लेकर तीन घंटे पूछताछ की। एफिलिएशन से संबंधित कागजात खंगाले। इससे जुड़े कुछ कागजात सीबीआई अपने साथ ले गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि कॉलेज की आवेदन समिति ने डीआईटी के इन्फ्रास्ट्रक्चर की जांच की थी। वहां पर्याप्त आधारभूत संरचना न मिलने के कारण 120 की जगह सिर्फ 60 सीटों पर ही मान्यता दी थी। एडमिशन के बाद जेयूटी ने आधी कर दी थी सीटें एआईसीटीई ने डीआईटी में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए डिप्लोमा पाठ्यक्रम में 60 से बढ़ाकर 120 सीटें करने की मंजूरी दी थी। इसी आधार पर छात्रों ने कॉलेज में नामांकन लिया और पढ़ाई भी शुरू की। इसके बाद जेयूटी ने कॉलेज की सीटे घटाकर 60 कर दी। इससे शेष 60 छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया और वे परीक्षा नहीं दे पाए। यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने इसपर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यहां ट्रैफिक पुलिस की तरह छात्रों को फंसाया गया। कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। अब तीन फरवरी को सुनवाई होगी, जिसमें सीबीआई को रिपोर्ट देनी है।


