जेलों में लगना था 4जी जैमर, पतरातू में बनना था ग्लास ब्रिज, सभी तकनीक व टेंडर में फंसे

राज्य सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट 24 फरवरी को पेश होना है, लेकिन उससे पहले पिछले बजट की घोषणाओं की हकीकत कुछ और है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में कई योजनाओं को जमीन पर उतारने की बात कही गई थी, वे अब तक धरातल पर नहीं उतर सकीं। सुरक्षा से लेकर पर्यटन विकास तक की महत्वपूर्ण परियोजनाएं फाइलों और कागजों तक सिमट कर रह गई। 3 मार्च 2025 को वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विधानसभा में घोषणा की थी कि राज्य की जेलों में मोबाइल फोन के अवैध उपयोग पर रोक लगाने के लिए 4जी मोबाइल फोन जैमर और फोन डिटेक्टर लगाए जाएंगे। उद्देश्य था कि जेल के अंदर से अपराध संचालन और धमकी देने जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हो सके। लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर बढ़ने के बावजूद राज्य के किसी भी कारा में 4जी जैमर स्थापित नहीं हो सका। परिणामस्वरूप जेलों से धमकी और आपराधिक गतिविधियों के संचालन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इसी तरह पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दशम, हुंडरू, नेतरहाट और पतरातू में ग्लास ब्रिज निर्माण की घोषणा भी की गई थी। इसे राज्य के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने वाली परियोजना बताया गया था। मगर वित्तीय वर्ष खत्म होने को है और इन परियोजनाओं का काम शुरू तक नहीं हो पाया है। ऐसे में नया बजट पेश होने से पहले यह सवाल अहम हो गया है कि पिछली घोषणाओं का क्या हुआ। जनता की निगाहें अब सिर्फ नई घोषणाओं पर नहीं, बल्कि पुराने वादों की जवाबदेही पर भी टिकी हैं। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी कागजों में अटकी हुई हैं। विभाग द्वारा मुख्यालय अधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालयों तथा लैम्पस-पैक्स के लिए आधारभूत संरचना विकास और मरम्मत मद में 56 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। हालांकि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, लेकिन निबंधक कार्यालय की ओर से अब तक इस संबंध में प्रस्ताव ही प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण योजना पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। इसी तरह सहकारिता प्रभाग के अंतर्गत क्षेत्रीय कार्यालय भवन निर्माण योजना के लिए 10.20 करोड़ रुपए का उपबंध किया गया। इसके तहत संयुक्त सहकारिता भवन सह कॉन्फ्रेंस हॉल निर्माण के लिए 4.93 करोड़ रुपए तथा फूदी, खूंटी स्थित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र के लिए 6.41 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई। लेकिन इन प्रस्तावों की जांच कर प्रतिवेदन समर्पित करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। दशम, हुंडरू, नेतरहाट एवं पतरातू में जो ग्लास ब्रिज बनाना है, वर्तमान में ये परियोजनाएं डीपीआर तैयार करने और राजस्व आकलन के लिए कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया में है। पर्यावरणीय प्रभाव और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। जबकि, झारखंड की जेलों में 4जी जैमर व मोबाइल फोन डिटेक्टर लगाने की योजना वर्तमान में तकनीकी और टेंडर संबंधी बाधाओं के कारण लंबित है।

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