झारखंड हाईकोर्ट ने दैनिक भास्कर में छपी तीन खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने 31 अगस्त को छपी खबर ‘जेल की सुरक्षा पर भास्कर पड़ताल… 300 रुपए देकर कैदी से रोज मुलाकात, 20 हजार दीजिए… महीने भर कुछ भी भेजिए’ को गंभीरता से लिया है। अदालत ने जेल प्रशासन आैर राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि जेल में कैदी से मिलने की क्या व्यवस्था है, क्या कैदी से मुलाकात के लिए पैसे लिए जाते हैं। इसी तरह उसी दिन के अखबार में प्रकाशित समाचार रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज में रैगिंग, छात्र की पिटाई मामले को भी अदालत ने गंभीरता से लेते हुए कॉलेजों की सुरक्षा पर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि कॉलेजों में रैकिंग रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसके बाद अदालत ने 1 सितंबर को जनता की आवाज कॉलम में प्रकाशित खबर रिम्स का बायो वेस्ट बन गया सिरदर्द… सामान्य कचरे में मिला दे रहे हैं सफाईकर्मी, संक्रमण का मंडरा रहा खतरा… इस पर भी अदालत ने रिम्स प्रबंधन से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि रिम्स में मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल की क्या व्यवस्था है।


