छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय के बाद EOW पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार कर सकती है। कोर्ट की अनुमति लेकर ईओडब्ल्यू की टीम बुधवार और गुरुवार दो दिन पूछताछ के लिए जेल पहुंची थी। दो दिन में 10 घंटे तक जेल में लखमा से पूछताछ की गई। जानकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कवाली लखमा ने अधिकांश सवालों का कोई जवाब नहीं दिया या जानकारी नहीं होने की बात कही। वहीं, जल्द ही EOW की ओर से कोर्ट में आवेदन कर लखमा को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर रिमांड में लेकर पूछताछ कर सकती है। लखमा के खिलाफ 3773 पन्नों का चालान पेश छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने कवासी लखमा के खिलाफ 3773 पन्नों का चालान पेश किया था। चालान में कहा गया है कि पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को इस घोटाले की पूरी जानकारी थी। उन्हें हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। साथ ही कहा गया है कि शराब घोटाले में वे सिंडिकेट के प्रमुख थे और उनसे सिंडिकेट को पूरा सहयोग मिला था। शराब नीति में बदलाव करने में भी लखमा की भूमिका अहम थी। इसके अलावा चालान में शराब दुकान में निरीक्षण करने से पहले आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति लेने का भी जिक्र है। इन्हें बनाया गया आरोपी ED ने विशेष न्यायाधीश को चालान के संबंध में बताया कि शराब घोटाले में अब तक कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें कवासी लखमा, अनवर ढेबर, अनिल टूटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी, ओम सांई ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट और सिद्धार्थ सिंघानिया सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। 21 जनवरी से जेल में बंद है लखमा ED ने 28 दिसंबर को पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, उनके बेटे हरीश कवासी के घर छापा मारा था। 15 जनवरी को लखमा को गिरफ्तार किया गया था। 21 जनवरी से लखमा रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।


