जैक अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पद खाली, शीघ्र नियुक्ति नहीं हुई तो 5 बोर्ड परीक्षाओं पर पड़ सकता है असर

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है, जो शनिवार शाम को समाप्त हो गया। जनवरी अंतिम सप्ताह से मार्च तक पांच बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है। इनमें आठवीं, 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं शामिल हैं। इन परीक्षाओं में 20 लाख से अधिक स्टूडेंट्स शामिल होने वाले हैं। इसके अलावा मेडिकल, इंजीनियरिंग और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं की तैयारी को लेकर कोचिंग एंट्रेंस एग्जाम का भी आयोजन किया जाना है। साथ ही छात्रवृत्ति परीक्षाओं का आयोजन भी करना है। परीक्षाओं के सफल संचालन के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का होना जरूरी है। रेगुलेशन के अनुसार, सभी महत्वपूर्ण निर्णय जैक बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं, जो चेयरमैन के बिना संभव नहीं है। इतना ही नहीं, जैक बोर्ड के तीन सदस्य विधायक होते हैं। ये पद भी लगभग पिछले तीन माह (22 अक्टूबर) से खाली हैं। इन परीक्षाओं के संचालन पर पड़ेगा असर 1. 8वीं बोर्ड परीक्षा : झारखंड बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में 8वीं की परीक्षा 28 जनवरी को आयोजित होने जा रही है। इस परीक्षा में रांची समेत राज्य के सभी जिलों के 5,18,002 स्टूडेंट्स शामिल होंगे। 2. 9वीं बोर्ड परीक्षा : झारखंड बोर्ड से संबद्ध स्कूलों का 9वीं बोर्ड की परीक्षा 29 व 30 जनवरी को आयोजित की जानी है। इसमें रांची समेत राज्य भर से 4,77,096 स्टूडेंट्स शामिल होंगे। 3. 11वीं बोर्ड परीक्षा : झारखंड बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में 11वीं बोर्ड की परीक्षा छह मार्च से शुरू होने जा रही है। इस परीक्षा में लगभग तीन लाख स्टूडेंट्स शामिल होंगे। 4. 10वीं बोर्ड परीक्षा : झारखंड बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में 10वीं बोर्ड यानि मैट्रिक की परीक्षा 11 फरवरी से शुरू हो रही है। इस परीक्षा में 4,33,886 स्टूडेंट्स शामिल होंगे। 5. 12वीं बोर्ड परीक्षा : झारखंड बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में 12वीं बोर्ड की परीक्षा 11 फरवरी से ही शुरू हो रही है। इस परीक्षा में 3,49,825 स्टूडेंट्स शामिल होने वाले हैं। परीक्षा से पहले नियुक्ति इसलिए है जरूरी परीक्षा शुरू होने से पहले जैक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है। बोर्ड परीक्षाओं पर नजर रख रहे जानकारों का कहना है कि परीक्षा से संबंधित अधिकांश कार्य गोपनीय होते हैं, जो चेयरमैन की मॉनिटरिंग में होते हैं। इसमें प्रश्न पत्र सेट करना, प्रिंट कराना समेत अन्य कार्य शामिल हैं। विशेष स्थितियों में परीक्षा से संबंधित अहम निर्णय जैक चेयरमैन के बिना संभव नहीं है। एकीकृत बिहार के समय वर्ष 1993 में परीक्षा से पहले अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया था, उस समय कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

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