रांची कॉलेज को अपग्रेड कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) का दर्जा मिलने के छह साल बाद डी.लिट. के लिए नया नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शनिवार को सिंडिकेट की 23वीं बैठक में साइंस डीन डॉ. इश्वरी प्रसाद के सवाल का जवाब देते हुए वीसी प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि रांची यूनिवर्सिटी का डी.लिट. नियम अडॉप्ट (अपनाया) नहीं किया जाएगा। बल्कि नया नियम बनाया जाएगा। इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा शीघ्र कदम उठाए जाएंगे। बताते चलें कि नया का दूसरा कन्वोकेशन सात फरवरी को होने जा रहा है। इसके लिए 86.14 लाख रुपए का दीक्षांत बजट की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। डॉ. शालिनी लाल ने वर्ष 2008 बैच में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर की वरीयता का मामला उठाया। इसके जवाब में सिंडिकेट ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की मेरिट लिस्ट के आधार पर वरीयता तय की जाएगी। बताते चलें कि इस बैच के शिक्षकों के बीच लंबे समय से वरीयता विवाद है। बैठक में वीसी के अलावा जेयूटी वीसी प्रो. डीके सिंह, डीएसडब्ल्यू डॉ. सर्वोत्तम कुमार, ह्यूमिनिटी डीन डॉ. मो. अयूब, साइंस डीन डॉ इश्वरी प्रसाद, रजिस्ट्रार डॉ. नमिता सिंह, प्रॉक्टर सह पीआरओ डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. जिंदर सिंह मुंडा, एफओ डॉ. आनंद मिश्र समेत अन्य सदस्य थे। शिक्षकों के बीच फंड वितरण की स्वीकृति राज्य के सरकार द्वारा रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए डीएसपीएमयू को एक करोड़ रुपए उपलब्ध कराया गया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा इस राशि को विवि के बीच रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए वितरित कर दिया गया। इससे संबंधित प्रस्ताव को प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि नैक मूल्यांकन में रिसर्च प्रोजेक्ट से सपोर्ट मिलेगा। पार्ट टाइम पीएचडी का अवरोध खत्म : डीएसपीएमयू में पार्ट टाइम पीएचडी करने से संबंधित अवरोध समाप्त हो गया है। पिछली सिंडिकेट में पार्ट टाइम पीएचडी करने से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। वहीं शनिवार को हुए सिंडिकेट में 22वीं सिंडिकेट में पार्ट टाइम पीएचडी करने से संबंधित लिए गए निर्णय को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।


