गुजरात से आए जैन श्वेताम्बर मुनि आचार्य नयचन्द सागर महाराज और मुनि अजीतचन्द सागर ने 6 जैन मुनि शिष्यों के साथ शनिवार शाम झालावाड़ के पुरातत्व संग्रहालय की मूर्तियों, चित्रों, सचित्र पुस्तकों का अवलोकन किया। इस मौके पर पर्यटन विकास समिति के संयोजक ओम पाठक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष इतिहासकार ललित शर्मा ने उन्हें संग्रहालय का अवलोकन कराकर विस्तृत जानकारी दी। अवलोकन करने के बाद आचार्य नयचन्द सागर महाराज ने इस संग्रहालय को सुन्दर पुरानिधि का खजाना बताया। आचार्य नयचन्द सागर महाराज ने कहा कि संग्रहालय के कई कक्षों में लाइट व्यवस्था खराब होने से वे इसमें प्रदर्शित चित्र नहीं देख सके। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय की जैन मूर्ति दीर्घा में काले पाषाण की जो मध्यकालीन जैन मूर्ति पार्श्वनाथ की लिखी गई है, वह वास्तव में सुपार्श्वनाथ की है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एक मूर्ति को देवी बताया है। वह वास्तव में पुस्तक धारिणी सरस्वती की मूर्ति है। इसी प्रकार कौमारी देवी की मूर्ति का कला खण्ड भी अधूरा है। पुरातत्व विभाग को इन मूर्तियों के विवरण में संशोधन करके उसका सही विवरण अंकित करना चाहिए। मुनि महाराज ने सभी शिष्यों के साथ ऐतिहासिक धरोहर भवानी नाट्यशाला का बाहर से भी अवलोकन किया और इस वास्तुकला की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह आमजन के लिए भी खोली जाए, ताकि इस धरोहर का प्रचार-प्रसार हो सके और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। इस मौके पर महाराज के साथ देवकी नंदन वर्मा, रहमान, श्याम कुमार भी साथ रहे।


