बदलते समय के साथ अब बच्चों को प्राचीन शिक्षा भी दी जाने लगी है। इसी क्रम में नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति और गीता रामायण के जरिए उनके जीवन में नैतिकता का पाठ पठाने के लिए राजपुरोहित समाज की ओर से वेदांताचार्य डाॅ. ध्यानाराम महाराज के नेतृत्व में अनूठी पहल की गई है। इसके तहत समाज की ओर से अलग अलग जगहों पर प्राचीन ऋषि परम्परा के अनुसार गुरूकुल की स्थापना की गई है। जहां बच्चों को आधुनिक के साथ ही सनातन वैदिक शिक्षा भी दी जा रही है। इसको लेकर दैनिक भास्कर ने वेदांताचार्य से खास बातचीत की। उन्होंने शिक्षा को लेकर किए जा रहे कार्यों, वर्तमान समय के साथ प्राचीन शिक्षा, गीता रामायण आदि के स्वाध्याय के महत्व के बारे में बताया। बोले- गुरुकुल की स्थापना जरूरी वैदांताचार्य ने बताया कि विद्या वह है जो आपके जीवन को बंधनों से मुक्त करें। जो आपके विचारों को इतना फैला दें कि जिससे आप ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकें। हमारी विद्या भारतीय विद्या ऋषियों का निर्माण कर रही है। यही प्रयास गुरू महाराज खेतेश्वर महाराज की दिव्य प्रेरणा व सदगुरू महाराज तुलछाराम जी महाराज के पावन सान्निध्य में अखिल भारतीय राजपुरोहित समाज विकास संस्थान के माध्यम से गुरूकुलों की गई है। जिस प्रकार से सनातन धर्म से ही बौद्य, जैन, सिख ये सब अपने सनातन धर्म के ही अंग है। जो सिख परम्परा है वो भी सनातनी है। उनकी परम्परा है कि उनका बच्चा कहीं पर भी पढ़े, लेकिन गुरूवाणी में बहुत निष्ठा से आदर करता है उनका पाठ करता है। उसी प्रकार से बौद्य है वो भी जैन-आगम का पाठ करते हैं। उसी तरह से जो सनातनी है वो कम से कम गीता को अपने जीवन में अपनाए। क्योंकि बिना गीता, रामायण के जीवन में शांति नहीं हो सकती। जीवन सुखी नहीं हो सकता है। इसलिए हम अपने गुरूकुलों के माध्यम से ऋषिकुमारों को गीता, रामायण की शिक्षा दे रहे हैं। गीता और रामायण की दे रहे शिक्षा वैदांताचार्य ने बताया कि पौराणिक काल में जिस प्रकार से गुरूकुल होते थे उसी अनुसार संस्थान के माध्यम से भी अलग अलग जगहों पर गुरूकुलों की स्थापना की गई है। जिनके माध्यम से ऋषिकुल की विद्या समाज में प्रसारित हो इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। गुरूकुल में किस प्रकार से शिक्षा दी जाती है इस पर उन्होंने बताया कि वर्तमान शिक्षा के साथ ही गीता और रामायण के द्वारा शिक्षा दी जा रही है। नैतिकता क्या है उसकी तरफ ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले बच्चों के लिए नैतिकता क्या है इसके बारे में उन्हें बताने का मूल प्रयास किया जा रहा है। क्योंकि नैतिकता धर्म है और धर्मनिष्ठ शिक्षा ही व्यक्ति के जीवन को सुखी और शांतिमय बना सकता है। गुरूकुल में संस्कृति, हिंदी, अंग्रेजी तीन भाषाएं सिखाई जाती है। वहां पर प्राचीन शिक्षा को ही नए तरीके से पेश कर रहे हैं। युवा समाज और राष्ट्र की सेवा करें वैदांताचार्य ने बताया कि छोटी छोटी बातों पर सुसाइड जैसे कदम उठाने वाले युवाओं को लेकर कहा कि हृदय और बुद्धि दोनों मिलेगी तो ही व्यक्ति के जीवन में श्रद्धा, आस्था प्रकट होगी। इसलिए जीवन में गीता -रामायण का स्वाध्याय होगा, नैतिक मुल्यों का स्वाध्याय होगा तो जीवन में यह समस्या स्वतः ही खत्म हो जाएगी। व्यक्ति को यह समझ में आएगा कि मैं केवल मैं नहीं हूं। मेरे साथ पूरा विश्व है। उसके साथ वसुधैव कुटुम्बकम की भावना जागृत होगी। उन्होंने समाज को सीख देते हुए कहा कि कुलगुरू खेतेश्वर महाराज व ऋषियों के संदेशों को अपने जीवन में धारण करें। उनके उपदेशों को अपने जीवन में धारण करेंगे तो जरूर समाज और राष्ट्र की महान सेवा हो जाएगी।


