राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ जोधपुर परिसर में अधिवक्ताओं ने महीने के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन जोधपुर के पदाधिकारियों की अगुवाई में वकीलों ने डोम एरिया में सोमवार को एकत्र होकर नारेबाजी की। हाईकोर्ट प्रशासन के फैसले का विरोध दर्ज कराया। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर सहित सभी अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक कार्यों में अधिवक्ता 5 जनवरी को उपस्थित नहीं हुए। इससे 5 जनवरी को अदालती कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा और न्यायिक सुनवाई नहीं हो पाईं। इस संबंध में 3 जनवरी को दोनों वकील संगठनों की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था। इसमें हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्ष 2026 में प्रत्येक महीने के 2 शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने और रात्रिकालीन न्यायालयों के संचालन के निर्णय का विरोध किया जाएगा। बैठक में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन जोधपुर की निर्वाचित कार्यकारिणी और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन जोधपुर की निवर्तमान व नव निर्वाचित कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी व वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित थे। अदालतों में नहीं पहुंचे वकील
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर सहित सभी अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक कार्यों में अधिवक्ता स्वेच्छा से 5 जनवरी को उपस्थित नहीं हुए। इससे 5 जनवरी को अदालती कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा और न्यायिक सुनवाई नहीं हो पाईं। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी, हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष आनंद पुरोहित और नव निर्वाचित अध्यक्ष दिलीपसिंह उदावत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में वकीलों ने प्रदर्शन किया। वकीलों ने हाईकोर्ट प्रशासन से मांग की कि महीने के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने का फैसला वापस लिया जाए, क्योंकि इससे वकीलों की व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर असर पड़ता है। शनिवार-रविवार की साप्ताहिक छुट्टी की परंपरा टूटती है। जयपुर में CJ से कल होगी मुलाकात
लॉयर्स एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष उदावत ने बताया- मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल जयपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर कर मांगों को रखेंगे। बातचीत से इस मुद्दे का समाधान निकलने की उम्मीद है। इसके बाद तय होगा कि आंदोलन जारी रहेगा या नहीं। दूसरी ओर मंगलवार को वकील अदालतों में कामकाज करेंगे या नहीं। इस पर अभी तक आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ। संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा- जयपुर में हुई बातचीत के नतीजे के बाद अगली रणनीति पर फैसला किया जाएगा। वकील संगठनों के पदाधिकारियों ने सभी सदस्यों से अपील की है कि वे संगठित रूप से आंदोलन में शामिल हों और जयपुर में बातचीत के नतीजों का इंतजार करें। वकीलों की अन्य मांगें
3 जनवरी को हुई बैठक में राजस्थान के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह भी मांग उठाई थी कि राजस्थान में अधीनस्थ न्यायालयों को सप्ताह में पांच दिन कार्यदिवस के रूप में संचालित किया जाए। उनका तर्क है कि जिला मुख्यालयों पर रेवेन्यू कोर्ट, ए.डी.एम., एस.डी.एम. और राज्य सरकार के अन्य अधिकरण सप्ताह में पांच दिन ही कार्यरत रहते हैं, इसलिए अधीनस्थ न्यायालयों में भी पांच दिन कार्यदिवस किया जाना चाहिए। साथ ही दोनों एसोसिएशन ने रात्रिकालीन न्यायालयों के संचालन के निर्णय का भी विरोध किया। वकीलों ने कहा- रात्रिकालीन न्यायालयों में वकीलों की सुरक्षा, ट्रैवल और केस की तैयारी को लेकर गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


