गुरमीत लूथरा| अमृतसर एसजीपीसी की कार्यकारिणी बैठक में श्री अकालतख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार एवं श्री हरमंदर साहिब के हैड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के पूर्व जत्थेदार एवं गुरुद्वारा श्री मुक्तसर के ग्रंथी ज्ञानी सुल्तान सिंह को उनके मौजूदा पद से छुट्टी हो सकती है। यह फैसला एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में 27 नवंबर को एसजीपीसी मुख्यालय में होने वाली कार्यकारिणी बैठक में लिए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि एसजीपीसी कार्यकारिणी द्वारा उन्हें हटाए जाने की भनक लगते ही ज्ञानी रघबीर सिंह एसजीपीसी से लंबी छुट्टी लेकर विदेश यात्रा पर चले गए हैं। ज्ञानी रघबीर सिंह अमेरिका व अन्य देशों में सिखी के प्रचार प्रसार के लिए छह महीने की छुट्टी पर चले गए हैं। प्रधान धामी की तरफ से उनकी छुट्टी को मंजूरी दे दी गई है। जबकि पंथक सूत्रों के अनुसार ज्ञानी रघबीर सिंह ने स्वयं छुट्टी नहीं ली है बल्कि उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। सूत्रों के अनुसार ज्ञानी रघबीर सिंह की नौकरी में अभी तीन साल का समय बचा है। पंथक सूत्रों के अनुसार ज्ञानी सुल्तान सिंह को भी अमेरिका का आर वन वीजा हासिल हो गया है। वीजा हासिल होते ही वह भी एक साल की लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। ज्ञानी रघबीर सिंह को 179 दिनों जबकि ज्ञानी सुल्तान सिंह को एक साल की छुट्टी की स्वीकृति हासिल हो गई है। ज्ञानी सुल्तान सिंह का गुरुद्वारा सिख कल्चरल सोसायटी रिचमिंड हिल की तरफ से वीजा लगवाया गया है, इसलिए वीजा की शर्तों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक साल की छुट्टी हासिल की है। दो महीने पहले तक ज्ञानी सुल्तान सिंह श्री हरमंदर साहिब में ग्रंथी के तौर पर सेवाएं निभा रहे थे और अब वह विदेश यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। दोनों जत्थेदारों को हटाने की चर्चा की एक प्रमुख वजह 2 दिसंबर 2024 को शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रधान सुखबीर बादल एवं पूर्व अकाली मंत्रियों को दी गई। धार्मिक सजा के साथ-साथ स्व. पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को श्री अकालतख्त साहिब द्वारा ही 15 साल पहले प्रदान किया गया फखर ए कौम खिताब छीन लेने का फरमान जारी करना भी है। गौर हो कि 2 दिसंबर को हुए हुक्मनामों में खिताब छीन लेने का हुक्मनामा भी शामिल है जो अभी तक लागू है।


