ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद पेंडिंग:बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले, दोनों पक्षों को राजीनाम दाखिल करने का अतिरिक्त समय मिला

भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में राजीनामा पेश करने के लिए अब अतिरिक्त समय दिया जाएगा। ग्वालियर खंडपीठ में बुआओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित है। आवेदन में कहा गया कि राजीनामा दाखिल करने के लिए पहले से दी गई 90 दिनों की अवधि को बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाही के निस्तारण की तिथि से आगे अतिरिक्त 30 दिनों तक बढ़ाया जाए, ताकि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया है। 2010 में दर्ज हुआ था मामला दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे का विवाद लंबे समय से चल रहा है। यह मामला 2010 में जिला न्यायालय में दर्ज हुआ और 2017 में हाईकोर्ट में पहुंचा। बुआ और भतीजे की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वे समझौते के माध्यम से विवाद को समाप्त करना चाहते हैं। सितंबर में जिला न्यायालय ने याचिका का निराकरण करते हुए 90 दिनों में समझौता पेश करने का आदेश दिया था, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित केस के कारण यह संभव नहीं हो सका। इस कारण बुआओं की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई और हाईकोर्ट ने इसे मंजूरी दे दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले के निस्तारण के बाद दोनों पक्षों को 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, ताकि समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।

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