एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. वीपी पाण्डे ज्वॉइन करने के 24 घंटों बाद ही एक हफ्ते के अवकाश पर विदेश चले गए है। उन्होंने डीन का प्रभार डॉ. नीलेश दलाल (सुपरिटेंडेंट, एटीएच) को सौंपा है। दूसरी ओर पूर्व प्रभारी डीन डॉ. अशोक यादव शासन को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के बाद अब शासन के आदेश के इंतजार में है। रोचक बात यह कि तत्कालीन डीन डॉ. संजय दीक्षित के रिटायर होने के 14 दिनों में डीन का प्रभार तीन बार बदला है। गौरतलब है कि डॉ. पाण्डे ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार को डीन का पदभार ग्रहण कर लिया था। उन्होंने कोर्ट में आपत्ति ली थी कि उनके स्थान पर उनसे जूनियर को डीन का प्रभार दिया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने सीधे पदभार ग्रहण कर लिया था। इसे लेकर प्रभारी डीन डॉ. यादव ने आपत्ति लेते हुए उन्होंने लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखा। इसमें बताया कि डॉ. वीपी पांडे बिना शासन की स्वीकृति, आदेश और मेरे द्वारा चार्ज सौंपे बिना ही डीन की कुर्सी पर बैठकर काम करने लगे हैं। इस तरह से न सिर्फ डीन पद की गरिमा भंग हुई है बल्कि विवाद की स्थिति भी बन गई है। इस मामले में उन्होंने शासन से मार्गदर्शन मांगा है। मामले में डॉ. यादव का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं। लेकिन, हर चीज की प्रक्रिया होती है। इसका पालन किया जाता है। कोर्ट ज्युडिशियरी है और एडमिनिस्ट्रेशन अलग होता है। सामान्यत: कोर्ट से आदेश होता है तो सरकार को भेजते हैं। फिर जो ओपिनियन आता है उसके बाद उस पर निर्णय लिया जाता है। कोर्ट भी ऐसा डायरेक्शन नही देती कि सीधे जाकर ज्वाइन करें। चूंकि ऐसी कोई मामला होता है तो इसकी जानकारी शासन के संज्ञान में लाना और बताना जरूरी होता है। मैंने इसलिए लोक स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया। डॉ. यादव का कहना है कि ऐसा भी नहीं है कि मैं शुक्रवार वहां चार्ज देने के लिए उपलब्ध नहीं था। डॉ. पाण्डे मेरे लिए सम्माननीय है। उनके आते ही मेरी फोन पर उनसे चर्चा हुई थी। मैंने कहा था कि मुझे आदेश दे दीजिए मैं इसे फॉरवर्ड कर देता हूं। सरकार जो भी आदेश दे चाहे टेलिफोनिक भी हो तो मान्य करूंगा। बहरहाल, डॉ. यादव का कहना है मेरे पत्र के जवाब में शासन का जवाब अभी आया नहीं है। डॉ. पाण्डे के विदेश जाने की जानकारी भी मुझे नहीं है।


