किसी बैंक घोटाले के आरोपियों की मौत के बाद उनकी संपत्ति कुर्क की खबरें तो आपने सुनी होंगी, लेकिन अब इनके वारिसों को भी घोटाले का आरोपी बनाया गया है। भोपाल के झरनेश्वर नागरिक सहकारी बैंक में नियमों के खिलाफ नियुक्तियां, अवैध भत्ते व फर्जी भर्तियों के मामले में कोर्ट ने मृत संचालकों के वारिसों को भी आरोपी बनाया है। कोर्ट ने बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष समेत 10 संचालकों को दोषी मानते हुए वारिसों से 27.34 लाख रुपए की वसूली एक महीने में करने के आदेश दिए हैं। रकम नहीं देने पर चल-अचल संपत्ति से वसूली होगी। इस राशि पर 12% सालाना ब्याज भी लगाया जाएगा। संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाओं से जुड़ी अदालत ने तत्कालीन अध्यक्ष कमल अजवानी, उपाध्यक्ष रजनी मालवीय, अनीता अजवानी समेत संचालक हरीश मीरचंदानी, मनमोहन कुरापा, बीएच अंबवानी, राजीव तिवारी, लाल वासवानी, पुरुषोत्तम पंजवानी, सुरेश वाधवानी और राजेंद्र राठी को दोषी माना। दोषी ठहराए गए संचालकों में से चार अभी भी बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में हैं। गड़बड़ियों के चलते 2015 से 2023 तक बैंक प्रशासक के अधीन रहा। साल 2023 में चुनाव के बाद एचबीएस परिहार अध्यक्ष, रोहित पी श्रोती उपाध्यक्ष और संतोष कटियार बने। वारिसों को किस आधार पर आरोपी बनाया जा सकता है मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 64 और 58 बी में प्रावधान है कि कर्मचारी, अधिकारी या पदाधिकारी की मृत्यु के बाद उनके वारिसों से रिकवरी की जाए। ताकि नुकसान की भरपाई हो सके। एक्ट के अनुसार, वारिसों को आरोपी भी बनाया जा सकता है। -ओम पाटीदार, अध्यक्ष मप्र राज्य सहकारी अधिकरण अधिवक्ता संघ


