‘झाड़ियों के कारण लोको पायलट को नहीं दिखा हाथी’:हरिद्वार में वार्डन बोले- स्पीड लॉग्स मांगे गए, रियल-टाइम सिस्टम तैयार कर रहे

हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व में 1 नवंबर को सुबह ट्रेन की चपेट में आकर हाथी के बच्चे की मौत के बाद वन विभाग अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। हादसे वाले ट्रैक रायवाला से मोतीचूर के बीच रात की गश्त बढ़ा दी गई है और रेलवे से संचार व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में राजाजी टाइगर रिजर्व के वार्डन अजय लिंगवाल ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद सबसे पहली कार्रवाई के रूप में पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए रेलवे से स्पीड लॉग, ट्रेन की वास्तविक स्पीड और घटना के समय की तकनीकी डिटेल्स मांगी गई हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां हल्का कर्व है और उसी समय इलाके में हल्की धुंध भी थी। इन दोनों पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है। विभाग अब रेलवे के साथ मिलकर एक ऐसी प्रणाली तैयार करने की कोशिश में है जिससे भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना होते-होते टाली जा सके। सवाल-जवाब में पढ़िए पूरा इंटरव्यू…. सवाल: घटना के बाद अब क्या कार्रवाई की जा रही है?
जवाब: हमारे द्वारा पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के खिलाफ वन अपराध दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा रेलवे से ट्रेन के स्पीड लॉग और उस समय की स्पीड से जुड़ा पूरा डेटा मांगा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रेन किस स्पीड पर चल रही थी। सवाल: यह पहली घटना नहीं है। आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए क्या योजना है?
जवाब: शीर्ष स्तर पर अब निगरानी और गश्त को पहले से अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। रेलवे के साथ संचार को बढ़ाया जा रहा है ताकि यदि किसी भी समय ट्रैक पर किसी वन्यजीव की गतिविधि नजर आए तो तुरंत निकटतम स्टेशन को अलर्ट भेजा जा सके और लोको पायलट स्पीड नियंत्रित कर सकें। हमारा ध्यान यही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत रियल-टाइम सिस्टम तैयार हो। सवाल: ट्रैक लंबा है और वन्यजीव किसी तय समय पर नहीं दिखते। ऐसे में निगरानी कैसे होगी?
जवाब: राजाजी टाइगर रिजर्व का यह सेक्शन लगभग 24–25 किमी लंबा है। यहां पहले से कई वॉच टावर मौजूद हैं। हमारी गश्त टीमें हर 8 घंटे में शिफ्ट बदलती हैं और वॉच टावरों से ट्रेन मूवमेंट के साथ-साथ वन्यजीवों की गतिविधि लगातार मॉनिटर की जाती है। रात के समय गश्त को विशेष रूप से बढ़ाया गया है। सवाल: यह इलाका इतना संवेदनशील क्यों माना जाता है?
जवाब: यह पूरा क्षेत्र वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है। इसी वजह से यह इलाका संवेदनशील माना जाता है। हाथियों सहित कई जानवर नियमित रूप से यहां मूवमेंट करते हैं। इसलिए रेलवे, वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। 4 हाथी कर रहे थे ट्रैक पार, बच्चा नहीं कर पाया सोमवार सुबह हरिद्वार-देहरादून रेल मार्ग पर राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज में हावड़ा-दून एक्सप्रेस की चपेट में आने से 3-4 साल के शिशु हाथी की मौत हो गई थी। हादसा सुबह करीब 5:30 बजे मोतीचूर–रायवाला के बीच हुआ, जहां ट्रेन के लोको पायलट द्वारा इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बावजूद धुंध के कारण हाथी ट्रैक नहीं पार कर सका। घटना के बाद ट्रेन दो घंटे तक रुकी रही, यात्री घबरा गए और कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथी के शव को ट्रैक से हटाया और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत लोको पायलट व सहायक पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।

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