झाबुआ जिले के पेटलावद ब्लॉक के ग्राम गोदडिया में ग्रामीणों ने जल संरक्षण के लिए अपनी सदियों पुरानी ‘हलमा’ परंपरा का उपयोग किया। रविवार को कटारा फलिया की ऊंची टेकरी पर श्रमदान कर पानी के बहाव को रोकने और भू-जल स्तर सुधारने का कार्य किया गया। इस पारंपरिक ‘हलमा’ पद्धति (सामुदायिक श्रमदान) के तहत, ग्रामीणों ने मिलकर एक गली प्लग (छोटा डैम) का निर्माण किया। इस पहल से ग्रामीणों को दैनिक उपयोग के लिए और मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। जल संरक्षण के इस कार्य में कटारा फलिया के 40 से अधिक परिवारों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने ढोल, कुंडी और थाली की थाप पर पारंपरिक नृत्य करते हुए श्रमदान किया। इस दौरान नई पीढ़ी को मिट्टी और जल संरक्षण की विरासत सौंपने का सामूहिक संकल्प लिया गया। इकाई लीडर धर्मेंद्र सिंह चुंडावत ने कहा कि यदि समाज एकजुट होकर प्रयास करे, तो जल संकट जैसी गंभीर समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक सहजकर्ता मुकेश पोरवाल ने सामूहिकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एकता से कठिन कार्य भी सरल हो जाते हैं और परिणाम अधिक प्रभावी मिलते हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन सामुदायिक सहजकर्ता दीपक मईडा द्वारा किया गया। इस कार्य में ग्राम स्वराज समूह के दिनेश कटारा, पूनमचंद, कैलाश, हीरा डोडियार के साथ प्रेमलता डामर, ललिता कटारा और लीलावती सिंगाड़ सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया।


