झामुमो की खामोश राजनीति… 6 ने भरा पर्चा, पार्टी अब भी चुप

नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया बुधवार को समाप्त हो गई, लेकिन राजधानी की राजनीति में असली चर्चा उम्मीदवारों से ज्यादा राजनीतिक रणनीतियों को लेकर है। सबसे अधिक ध्यान खींच रही है चुनाव पर झामुमो की खामोशी, जिसने चुनावी सरगर्मी के बीच भी अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। दिलचस्प स्थिति यह है कि झामुमो आधिकारिक तौर पर चुनाव को लेकर चुप्पी साधे हुए है, जबकि पार्टी से जुड़े 6 नेताओं ने अलग-अलग पदों के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। राजधानी जैसी प्रतिष्ठित मेयर सीट पर भी नामांकन के अंतिम समय तक पार्टी की ओर से न तो किसी अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा हुई और न ही स्पष्ट समर्थन की रणनीति सामने आई। नामांकन भरने वाले नेताओं का कहना है कि चूंकि पार्टी स्तर पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है और यह चुनाव गैरदलीय आधार पर हो रहा है, इसलिए उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर पर्चा दाखिल किया है। उनका यह भी कहना है कि यदि एक-दो दिनों में पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश आता है, तो वे उसी के अनुरूप निर्णय लेंगे। यानी मैदान में उतरने के बावजूद अंतिम रुख अब भी पार्टी आदेश पर निर्भर बताया जा रहा है। इन झामुमो नेताओं ने मेयर पद के लिए भरा पर्चा
नामांकन के आखिरी दिन बुधवार को झामुमो नेता के तौर पर मेयर पद के लिए अजीत लकड़ा, रामशरण तिर्की, सुजीत कुमार कुजूर, सुजीत विजय, आनंद कुजूर और वीरू तिर्की ने पर्चा भरा।
झामुमो नेतृत्व तैयारी को लेकर संतुष्ट नहीं झामुमो नेता के तौर पर नामांकन करने वाले विभिन्न नेताओं से ऑफ द रिकार्ड बातचीत के बाद यह सामने आया कि सारा कुछ संगठन की कमी के कारण हुआ है। जब पार्टी अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ने रांची को लेकर बैठक किया था, तो वे रांची जिला और रांची महानगर संगठन को लेकर संतुष्ट नहीं दिखे। इसके बाद पार्टी यह जोखिम लेने के मूड में नहीं थी कि अपना प्रत्याशी उतारे और वह बुरी तरह से हार जाए। ऐसे में राजधानी सीट होने के कारण पार्टी की प्रतिष्ठा पर आंच आती और विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता था। ऐसे में पार्टी ने खामोश रहना ही उचित समझा। दूसरी सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि झामुमो के पास राजधानी की मेयर सीट के लिए कोई प्रतिष्ठित एवं बड़ा चेहरा नहीं था। जो नेता दावा कर रहे हैं, वह एक खास पॉकेट में मजबूत हो सकते हैं। पूरी राजधानी रांची के लिए नहीं। ऐसे में इसकी संभावना प्रबल हो गई है कि पार्टी राजधानी की मेयर सीट को लेकर पूरी तरह चुप्पी साधते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस को सपोर्ट कर दे।

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