भारत के 19 राज्यों के 97 अधिकारियों को राज्य सिविल सेवा से केंद्रीय सिविल सेवा में पदोन्नत किया गया है। ये अधिकारी केंद्र सरकार की ओर से आयोजित 127वें इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए, जिसका उद्देश्य उन्हें केंद्रीय प्रशासन की बारीकियों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण की शुरुआत 3 मई को हुआ और यह 13 जून तक चलेगा। झारखंड से प्रीति रानी इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाली एकमात्र अधिकारी हैं। वे वर्तमान में झारखंड सरकार के उद्योग विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत हैं। राष्ट्रपति से की मुलाकात, साझा किए अनुभव प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी देश के विभिन्न शहरों और संस्थानों की कार्यशैली से रूबरू हुए। कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान प्रीति रानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें और उनके साथियों को देश के गौरवशाली इतिहास, प्रशासनिक गतिविधियों और ग्रामीण जीवन की स्थितियों को नजदीक से समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में कृषि, उद्योग, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य अनुकरणीय हैं। देश की विविधता और नवाचारों से मिली सीख प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में अधिकारियों ने देश की विभिन्न इकाइयों और स्थलों का दौरा किया। प्रीति रानी ने बताया कि वायुसेना, नौसेना, आईटीबीपी और बीएसएफ के जवानों के समर्पण को देखना एक प्रेरणादायक अनुभव था। उन्होंने जयपुर के कपड़े और संगमरमर उद्योग, कांचीपुरम के रेशम उद्योग, लखनऊ की चिकनकारी और ओडिशा के पिपली गांव के हस्तशिल्प को देखकर यह महसूस किया कि स्थानीय कारीगरी को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास संभव है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में कीवी की खेती और मत्स्य पालन जैसे प्रयासों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भूमिका को बताया प्रेरणास्रोत प्रीति रानी ने राष्ट्रपति मुर्मू की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके झारखंड के राज्यपाल रहते हुए राजभवन परिसर में किए गए नवाचार जैसे वृक्षारोपण, गौशाला, जलाशय और राष्ट्रीय चरखा की स्थापना पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यों में मार्गदर्शन दिया बल्कि उन्हें मानवीय संवेदनाओं से भी जोड़ा। महिला सशक्तिकरण, गरीब बच्चों की शिक्षा और पीड़ितों की सहायता जैसे कार्यों ने उन्हें प्रशिक्षुओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना दिया है।


