झारखंड की बकाया राशि देने पर केंद्र राजी, कोयला मंत्रालय और खान विभाग की टीम करेगी गणना

केंद्र सरकार झारखंड की बकाया राशि देने पर राजी हो गई है। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कोयला मंत्री जी किशन रेड्‌डी से मुलाकात की। उन्हें 1.36 लाख करोड़ रुपए बकाया भुगतान करने संबंधी मांग पत्र सौंपा। इस दौरान कोयला मंत्री ने मंत्रालय की अपर सचिव स्मिता प्रधान को निर्देश दिया कि वह कोयला मंत्रालय और झारखंड सरकार के खान विभाग के अधिकारियों की टीम गठित करे। यह कमेटी वास्तविक बकाया राशि की गणना करे। जो वास्तविक बकाया राशि होगी, वह झारखंड को दी जाएगी। दोनों नेताओं से भेंट में किशोर ने झारखंड का बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपए लौटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड अपने आंतरिक स्रोतों में वृद्धि कर सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए प्रयासरत है। राज्य के समुचि​त विकास के लिए केंद्र का आर्थिक सहयोग जरूरी है। इसके बाद कोयला मंत्री ने खनन मामले में झारखंड की बकाया राशि देने का आश्वासन दिया। तीन दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1.36 लाख करोड़ बकाया राशि न देने पर कोयला खदान बंद करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि कोयला उत्पादन ठप होने से देशभर में बिजली संकट उत्पन्न हो सकता है। सीएम की चेतावनी के बाद वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर दिल्ली गए और केंद्रीय कोयला मंत्री व वित्त मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने बकाया राशि के साथ ही झारखंड के लिए आर्थिक मदद की मांग भी की। कोयला कंपनियों पर भूमि अधिग्रहण का सबसे ज्यादा 1.01 लाख करोड़ बकाया मांग पत्र में राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य की आय का मुख्य स्रोत खनन है। करीब 80 फीसदी राजस्व कोयला खदानों से आता है। कोयला कंपनियों पर धुले कोयले की रॉयल्टी का 2900 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं पर्यावरण मंजूरी सीमा तक खनन पर 32 हजार करोड़ रुपए बकाया है।सबसे ज्यादा 1.01 लाख करोड़ रुपए भूमि अधिग्रहण का बकाया है। कुल मिलाकर यह राशि 1.36 लाख करोड़ रुपए बनता है। केंद्र सरकार इस बकाया राशि का भुगतान करे तो झारखंड के विकास में यह काफी सहायक होगा। मांग पत्र में लिखा- बकाया राशि का भुगतान हो तो राज्य को काफी मदद मिलेगी झारखंड के वित्त मंत्री 1.36 लाख करोड़ बकाया भुगतान के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री व कोयला मंत्री से मिले मांग पत्र में कहा गया है कि झारखंड का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। सूखे ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण, कृषि व पशुपालन के माध्यम से इसे मजबूत करना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार से अ​ार्थिक मदद की जरूरत है। कोयला कंपनियों पर बड़ी राशि बकाया है। इसका भुगतान होने से राज्य को काफी मदद मिलेगी। केंद्र से मिलने वाला अनुदान भी कम होता जा रहा है। इससे विकास में बाधा आ रही है। झारखंड में अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के काफी लोग हैं। इनकी उन्नति के लिए केंद्र से सहयोग जरूरी है।

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