झारखंड के कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का बड़ा ऐलान सरना धर्म कोड की मांग को लेकर सड़क से संसद तक करेंगे संघर्ष

भास्कर न्यूज | सरायकेला झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश रविवार को सरायकेला पहुंचे, जहां उन्होंने जिला परिषदन में संगठन सृजन 2025 को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में राज्य प्रभारी के राजु, पूर्व विधायक बंधु तिर्की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू जिला अध्यक्ष, पूर्व जिला अध्यक्ष छोटेराय ,सुरेश धारी, प्रखंड अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और पर्यवेक्षकों सहित कई पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश अध्यक्ष कमलेश ने स्पष्ट किया कि संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की योजना के तहत सभी प्रखंडों और मंडलों में नई कमेटियों का गठन किया जा रहा है। प्रत्येक प्रखंड व मंडल कमेटी में 12 सदस्य होंगे जिसमें एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और नौ कार्यकारिणी सदस्य शामिल होंगे। कमेटियों में ओबीसी, महिला और अल्पसंख्यक वर्गों का समुचित प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। जिला स्तर की कमेटी 24 सदस्यों की होगी, जबकि भविष्य की प्रदेश कमेटी में 48 सदस्य होंगे। उन्होंने बताया कि सरायकेला जिले के 12 में से 6 प्रखंडों में कमेटियों का गठन हो चुका है और शेष 6 की प्रक्रिया तीन दिनों में पूरी कर ली जाएगी। प्रखंड और मंडल के गठन के बाद पंचायत और वार्ड स्तर पर भी संगठन विस्तार किया जाएगा। सरना धर्म कोड पर तेज होगा आंदोलन : केशव महतो कमलेश ने रविवार को राजभवन के समक्ष आयोजित होने वाले विशाल ऐतिहासिक धरना प्रदर्शन को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए सरना धर्म कोड की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड विधानसभा इस प्रस्ताव को पहले ही पारित कर चुकी है लेकिन केंद्र सरकार अब तक चुप है। अगर केंद्र की नींद फिर भी नहीं खुली तो हम जंतर-मंतर तक जाएंगे। हमारे विधायक, सांसद, मंत्री सब इस आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के उपासक हैं और उनकी मान्यता अन्य धर्मों से भिन्न है। जनगणना के कॉलम में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन को कोड मिला है तो आदिवासियों को सरना धर्म कोड क्यों नहीं? कमलेश ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में सरना धर्म कोड की लड़ाई को मजबूती से उठाने की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि जैसे जातीय जनगणना के मुद्दे पर केंद्र को झुकना पड़ा वैसे ही सरना कोड पर भी भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ेगा। आगामी धरना कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अधिकतम भागीदारी की अपील की।

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