झारखंड के सफल किसानों से खेती के गुर सीखकर लौटीं कृषि सखियां

भास्कर न्यूज | ​जशपुरनगर जशपुर जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें लखपति दीदी के रूप में स्थापित करने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार ठोस पहल कर रहा है। इसी कड़ी में कुनकुरी विकासखंड की 47 कृषि सखियों के दल ने झारखंड की राजधानी रांची के ओरमांझी क्षेत्र का शैक्षणिक परिभ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना और उन्हें परंपरागत किसान से आगे बढ़ाकर सफल कृषि उद्यमी के रूप में विकसित करना रहा। बिहान योजना के अंतर्गत आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण में कृषि सखियों को उन्नत और लाभकारी खेती के प्रत्यक्ष उदाहरण देखने का अवसर मिला। दल ने झारखंड एवं भारत सरकार द्वारा सम्मानित प्रगतिशील कृषक गणशू महतो और महिला किसान संगीता देवी के फार्म का भ्रमण किया। यहां महिलाओं ने देखा कि किस प्रकार वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। कृषि सखियों को आधुनिक तकनीकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण के लिए प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग, लताओं वाली सब्जियों के लिए मचान विधि अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करना, ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से बूंद-बूंद सिंचाई कर पानी और उर्वरकों का सटीक प्रबंधन तथा मृदा परीक्षण के आधार पर जैविक खाद और उचित उर्वरकों के चयन की जानकारी दी गई। इन तकनीकों से कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करने के तरीके समझाए गए। समारोह को संबोधित करते हुए समग्र शिक्षा के एपीसी गणेश सिन्हा ने कहा कि शासन द्वारा पीएम श्री शालाओं में बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक और भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन बच्चों की छुपी प्रतिभा को सामने लाने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम में समग्र शिक्षा एपीसी दीपा गुप्ता, अरुण चंद्रा, सरपंच पार्वती भगत, शाला समिति अध्यक्ष शांतिलाल यादव, शिक्षक सीमा गुप्ता, ऋचा गुप्ता, मीना सिन्हा, मनोहर टोप्पो, तरीका बुनकर, रंजिता सारंगी, रूबी प्रियंका खेस, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। 8 एकड़ क्षेत्र में सब्जी उत्पादन कर लाखों रुपए की आमदनी कर रही हैं महिलाएं इस दौरान उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने 40 एकड़ भूमि लीज पर लेकर खेती का जोखिम उठाया। वर्तमान में वे 8 एकड़ क्षेत्र में उन्नत सब्जी उत्पादन कर लाखों रुपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं। वहीं शेष 32 एकड़ में अंतर्वर्ती फसलें लगाकर न केवल अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनाए रख रही हैं। उनकी इस सफलता ने जशपुर की कृषि सखियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। महिलाओं ने कहा कि इस भ्रमण से उन्हें यह समझ में आया कि खेती केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि सही तकनीक और सोच के साथ इसे एक सफल व्यवसाय के रूप में भी अपनाया जा सकता है।

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