पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है, जब झारखंड जैसे संसाधन–समृद्ध राज्यों का समुचित विकास हो। शनिवार को चैंबर भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि झारखंड प्राकृतिक संपदा से भरा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यह पिछड़े राज्यों की श्रेणी में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध कोयला, वन संपदा और खनिजों का स्थानीय स्तर पर उपयोग कर उद्योग स्थापित किए जाएं। कोयले से जुड़े मिथेन प्लांट, स्टील प्लांट, और हाइड्रोलिक प्रोजेक्ट लगाए जाएं और इसके लिए एक सुदृढ़ नीति तैयार की जाए। सुरेश प्रभु ने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह झारखंड के विकास के लिए एक प्रभावी मैनेजमेंट प्लान बनाए, ताकि फाइनेंस कमीशन के सामने मजबूत प्रस्ताव रखा जा सके और केंद्र से सहयोग प्राप्त करना आसान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य का अधिकांश बजट वेतन और अन्य मदों में खर्च हो जाता है, जबकि विकास के लिए कम-से-कम 40% बजट उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में खीज का बड़ा संभावित भंडार है, जो अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। प्रभु ने आश्वस्त किया कि जल्द ही वित्त आयोग के साथ बैठक कर झारखंड के उद्योग जगत की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। मौके पर चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, महासचिव रोहित अग्रवाल, पूर्व सांसद महेश पोद्दार, रोहित पोद्दार, नवजोत अलंग, प्रवीण लोहिया, अनिल अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, मनीष सर्राफ, तुलसी पटेल, राम बांगड़, डॉ. अभिषेक, विनीता सिंघानिया समेत अन्य सदस्य थे। देश में तकनीकी रूप से काफी प्रयास : पोद्दार पूर्व राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने चिंता जताई कि देश में तकनीकी रूप से काफी प्रयास हो रहे हैं। नई इकॉनोमिक महत्व काफी बढ़ गया है और हम-घूम फिरकर 40 प्रतिशत मिनरल पर आ जाते हैं, जिसका महत्व कम होते जा रहा है। जिसे वैल्यू एडिशन की दरकार है। मुख्यमंत्री ने 2050 तक विकसित झारखंड की बात की, जिसका स्वागत है। वहीं, प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। दोनों में कोई खास अंतर नहीं लेकिन देश की वृद्धि दर से करीब-करीब झारखंड की भी वृद्धि दर होनी चाहिए। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर चैंबर ने किया संवाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु बोले- चैंबर भवन में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर संवाद करते पूर्व केंद्रीय मंत्री व अन्य।


