मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मनाए जाने वाली मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती इस वर्ष 1 दिसंबर को विशेष आध्यात्मिक उत्साह के साथ आयोजित की जाएगी। माना जाता है कि इसी पावन तिथि पर कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान प्रदान किया था, इसलिए यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है। शहर के विभिन्न मंदिरों-लक्ष्मी-नारायण, श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर, श्याम मंदिरों और प्रणामी मंदिर में भव्य आरती, गीता पाठ, कीर्तन और अलौकिक शृंगार की तैयारियां जोरों पर हैं। आध्यात्मिक संस्थानों में प्रवचनों, कार्यशालाओं और गीता उत्सवों के माध्यम से गीता के उपदेशों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी जाएगी। मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और श्रीहरि की आराधना से मनुष्य को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। गीता पंचामृत कार्यशाला आयोजित विवेकानंद सरोवर के पास स्थित चिन्मय आश्रम में रविवार को गीता पंचामृत कार्यशाला आयोजित है। इसमें विषय है चिंता और दुख से दूर रहने और उत्साहपूर्ण जीवन जीना। श्रीराधा कृष्ण का अलौकिक शृंगार श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में एक दिसंबर को गीता जयंती पर विशेष पूजन अनुष्ठान होंगे। श्री राधा कृष्ण का अलौकिक श्रृंगार, पूजा-अर्चना, गीता पाठ व भजन-कीर्तन और प्रसाद भोग लगेगा। योगदा सत्संग मठ में सन्यासी स्वामी ईश्वरानंद आज देंगे प्रवचन परमहंस योगानंद पथ स्थित योगदा सत्संग मठ में परमहंस योगानंदजी की क्रियायोग शिक्षाओं पर प्रवचन रविवार को होगा। इसमें वाईएसएस के वरिष्ठ सन्यासी स्वामी ईश्वरानंद गिरि वक्ता होंगे। विषय रहेगा निष्काम कर्म: आत्मा की मुक्ति का मार्ग। क्यों मनाई जाती है गीता जयंती ज्योतिष शालिनी वैद्य के अनुसार जब श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था उस दिन मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी। इस कारण इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाई जाती है। इस दिन उपवास करने से मन पवित्र व शरीर रोग से मुक्त होता है। सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है तथा जीवन में सुख-शांति मिलती है। इस व्रत की करने से मनुष्य मोक्ष प्राप्त करता है। भक्त अगर कोई व्रत न कर सिर्फ एकादशी का व्रत करके भगवान विष्णु की आराधना करे, तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं। वैष्णव भक्त इस दिन को बैकुंठ जाने का दिन मानते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्री हरि अपने भक्तों के लिए बैकुंठ का द्वार खोल देते हैं। मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को अंत समय में स्वयं भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर लेने आते हैं। श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर व श्याम मंदिर में आरती, गीता पाठ, कीर्तन और अलौकिक शृंगार की तैयारियां शुरू


