भास्कर न्यूज | बड़कागांव 26 किलोमीटर दूर अति संवेदनशील सुदूर ग्रामीण क्षेत्र झिंकझोर गांव में 1998 में उग्रवादियों के द्वारा नौ ग्रामीणों की हत्या कर दी गई थी। परंतु अब तक झारखंड सरकार के द्वारा किसी भी मृतक के परिजन को ना ही मुआवजा मिला और ना ही नौकरी। मृतक के परिजन अब तक मुआवजा और नौकरी के लिए आस लगाए बैठे हैं। उग्रवादियों के द्वारा जिन लोगों की मौत हुई थी उनमें से मंगरा मुंडा, महादेव मुंडा ,कार्तिक मुंडा, असीनवा मुंडा, बालो मुंडा ,सोमरा मुंडा, के अलावा दो अन्य पुरुष एवं एक महिला का नाम शामिल है। आंगो पंचायत के पूर्व उप मुखिया राजू मुंडा बताते है कि 1998 में उग्रवादियों के द्वारा गांव में ही नौ लोगों को बंधक बनाकर हत्या कर दी गई थी। जिसमें तीन लोगों का लाश बरामद हुआ था बाकी 6 लोगों का लाश उग्रवादियों ने गायब कर दिया था। कई बार मुआवजा के लिए पुलिस प्रशासन के पास चक्कर लगाते रहे परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। वहीं समाजसेवी कोलेश्वर गंझु ने कहा कि मृतक के परिजनों का हक व अधिकार था निश्चित रूप से उन्हें मिलना चाहिए था। जबकि कई लोगों का पोस्टमार्टम भी हुआ था ,प्रशासन के पास इसकी रिपोर्ट भी भेजी गई थी। वही कोइलंग निवासी किशुन तुरी ने बताया कि 1998 में जो घटना हुई थी, इसमें मैं खुद मुआवजा दिलाने के लिए प्रयासरत रहा था। तीन लोगों का पोस्टमार्टम हुआ था बाकी 6 लोगों का लाश नहीं मिलने के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था। तत्कालीन सीओ के द्वारा तीन परिजनों को 15 या ₹20000 करके मुआवजा मिला था। बाकी बचे 6 मृतकों के परिजनों के लिए निवर्तमान एसपी प्रवीण कुमार ने कहा था कि 7 साल पूरा होने के बाद हीं किसी लापता को मृत घोषित किया जा सकता है। तभी मुआवजा राशि मिल पाएगा । बताते चलें कि घटना के 2 वर्षों के बाद झारखंड राज्य का निर्माण हुआ और प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के द्वारा उग्रवादियों के हाथों मारे जाने वाले ग्रामीणों के परिजनों को ₹300000 मुआवजा एवं सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई थी। परंतु अब राज्य गठन में 25 वर्ष गुजर गए सरकार ना हीं सूद लिया है और ना ही मृतक के परिजनों को मुआवजा दी है। भास्कर न्यूज | हजारीबाग झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (जेरेडा) द्वारा हरित वृक्ष (ग्रीन ट्री) संस्था के सहयोग से हजारीबाग के डॉल्फिनो परिसर में लघु, कुटीर एवं मध्यम उद्योग़ (एम.एस.एम.ई.) संघों एवं व्यापार मंडलों के प्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की कुशलता, बचत के उपायों तथा ऊर्जा सेवा कंपनी (ई.एस.सी.ओ.) मॉडल की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था। इस आयोजन में लगभग 60 उद्यमियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हजारीबाग चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष नीरज अग्रवाल सचिव राकेश ठाकुर ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में संयुक्त सचिव तारिक अहमद, सदस्य विजय कुमार जैन ने भी अपनी सहभागिता निभाई। वहीं ऊर्जा से संबंधित नीतियों तथा प्रोत्साहनों पर अपने विचार साझा किया । कार्यशाला का तकनीकी सत्र अत्यंत जानकारीपूर्ण रहा, जिसमें ऊर्जा प्रबंधन विशेषज्ञ जे. के. व्यास और प्रमाणित ऊर्जा लेखापरीक्षक डॉ. चंदन कुमार तिवारी ने ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग, अपव्यय को रोकने के आधुनिक उपायों तथा ऊर्जा सेवा कंपनी (ई.एस.सी.ओ.) मॉडल की कार्यप्रणाली पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार यह मॉडल ऊर्जा की लागत को घटाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हो सकता है।प्रतिभागियों ने इन प्रस्तुतियों को अत्यंत उपयोगी, सरल एवं व्यवहारिक बताया और यह अपेक्षा जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए। जिससे क्षेत्रीय उद्योगों को नवाचार,ऊर्जा कुशलता तथा हरित विकास की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण एवं हरित वृक्ष संस्था की यह पहल हजारीबाग सहित पूरे झारखंड में ऊर्जा जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। जिससे प्रदेश के लघु और मध्यम उद्यम ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकें। प्रतापपुर| प्रखंड के भरही पंचायत के मरका गांव निवासी और मनरेगा के कुआं के लाभुक सुरेश यादव ने प्रखंड प्रशासन से कुआं का लंबित भुगतान की गुहार लगाया है। लाभुक सुरेश यादव ने बताया कि वर्ष 2023-24 वित्तीय वर्ष में मै अपने खेत मे मनरेगा से कुआं निर्माण करने की स्वीकृति लिया था।जिसकी प्राक्कलित राशि 395600 रुपए था।।इसका कार्य एजेन्सी पंचायत भरही है।कुआं को पूर्ण कर दिया हुं।योजना मे मेटेरियल की राशि मिली थी लेकिन मनरेगा से लगभग एक लाख रुपए का भुगतान नही मिल पाया है।इस संबंध मे मुखिया सुनिता देवी का कहना है कि प्रखंड मे मनरेगा का डिमांड लगभग तीन माह से बंद है।


