भास्कर न्यूज | सरायकेला देश में समावेशी लोकतंत्र की दिशा में दिव्यांगजनों को प्रतिनिधित्व देने की नई लहर शुरू हो गई है। तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों ने स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में दिव्यांगजनों को प्रतिनिधित्व देकर नई मिसाल पेश की है। उक्त जानकारी देते हुए झारखंड विकलांग मंच के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अब झारखंड में भी इस दिशा में गंभीर पहल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में 13,988 पदों को दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित कर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसमें शहरी निकायों, पंचायत यूनियनों और ग्राम पंचायतों में आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने पंचायती राज संशोधन अधिनियम-2019 के माध्यम से पंचायतों में दिव्यांगजनों के लिए नामांकन का प्रावधान किया है। सरकार एक महिला और एक पुरुष दिव्यांग को पंचायत में नामांकित कर सकती है, यदि चुनाव में उनका प्रतिनिधित्व न हो। राजस्थान सरकार ने नगर निकायों में दिव्यांगजनों को सदस्य मनोनीत कर प्रशासनिक जिम्मेदारी दी है। यह पहल न केवल दिव्यांगजनों को सम्मानजनक पहचान देती है, बल्कि उनकी सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी भी बढ़ाती है। झारखंड विकलांग मंच की दो वर्षों से चल रही पहल : झारखंड में पंचायत और निकायों में दिव्यांगजनों के प्रतिनिधित्व को लेकर पिछले दो वर्षों से झारखंड विकलांग मंच सक्रिय रूप से अभियान चला रहा है। मंच के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने राज्य सरकार से लगातार मांग की है कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान की तर्ज पर झारखंड में भी कानून संशोधन कर दिव्यांगजनों को पंचायत प्रतिनिधित्व दिया जाए।


