झारखंड में पेसा नियमावली मंजूर; अब जमीन अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की सहमति जरूरी

{अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य में लागू हो जाएगा यह बहुप्रतीक्षित पेसा कानून झारखंड में पेसा (पंचायत उपबंध, अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम-1996 लागू करने का रास्ता साफ हो गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पेसा नियमावली को मंजूरी दे दी गई। अब अधिसूचना जारी होते ही यह कानून लागू हो जाएगा। पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने बताया कि यह कानून राज्य के अनुसूचित जिलों में लागू होगी। लेकिन अनुसूचित जिलों के नगर निकाय क्षेत्र में यह लागू नहीं होगा, बल्कि सिर्फ पंचायतों में लागू होगा। इससे अनुसूचित जिलों में स्वशासन, भूमि, खनिज और जल प्रबंधन अब ग्राम सभा के हाथ मे चला जाएगा। ऐसे में ग्राम सभाएं पहले से कहीं ज्यादा सशक्त होंगी और विकास योजनाओं में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि यह नियमावली पेसा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ही बनाई गई है। गौरतलब है कि झारखंड देश के उन 10 राज्यों में शामिल था, जहां पेसा अधिनियम लागू करने के लिए अब ​तक नियमावली को मंजूरी नहीं मिली थी। आदिवासी संगठन इस मुद्दे को लगातार उठा रहा था। वहीं हाईकोर्ट का भी सरकार पर दबाव था। कैबिनेट की बैठक में कुल 39 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इधर, हाईकोर्ट में अब 13 जनवरी को सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में अब पेसा लागू करने पर 13 जनवरी 2026 को सुनवाई होगी। अवमानना याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने सरकार से कानून लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। कोर्ट में मौजूद पंचायती राज विभाग के सचिव ने बताया कि नियमावली के ड्राफ्ट को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इसलिए कुछ समय दें। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए 13 जनवरी की तिथि निर्धारित की। लेकिन कोर्ट ने बालू घाट सहित लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक बरकरार रखी। यह अवमानना याचिका आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने दायर की है। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मंगलवार को कैबिनेट में पेश होगा। सामान्य अपराधों की सुनवाई ग्राम सभा करेगी नियमावली में ये खास… पहले भी दो बार बना था ड्राफ्ट केंद्र सरकार ने वर्ष 1996 में पेसा कानून लागू किया था। इसका उद्देश्य राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के हितों की सुरक्षा करना था, लेकिन एकीकृत बिहार में इसकी नियमावली नहीं बनाई गई। वर्ष 2019 आैर 2023 में नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया गया था, लेकिन लागू नहीं किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। वर्ष 2024 में मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 2 माह के अंदर पेसा नियमावली लागू करने का निर्देश दिया था। पेसा नियमावली के अनुसार ग्राम सभा का गठन होगा और प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक होगी। ग्राम सभा के दसवें हिस्से या आधे सदस्यों की लिखित मांग पर ग्राम प्रधान को सात दिनों के भीतर बैठक बुलानी होगी। बैठक के कोरम के लिए ग्राम सभा के कुल सदस्यों के एक-तिहाई उपस्थिति अनिवार्य होगा। झारखंड पंचायती राज अधिनियम-2001 के प्रावधान पहले से ही पेसा के अनुरूप हैं। इसलिए पंचायत चुनाव पर इसका असर नहीं पड़ेगा। पेसा कानून को प्रभावी तरीके से किया जाएगा लागू : हेमंत कैबिनेट की बैठक के बाद प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेसा कानून को राज्य में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। पेसा कानून की नियमावली को व्यापक विमर्श और विभिन्न विभागों के साथ गहन मंथन के बाद अंतिम रूप दिया गया है। यह नियमावली अब राज्य की जनता को समर्पित की जा रही है। जमीनी स्तर पर इसका बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सभी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। “ इन जिलों में लागू होगा पेसा कानून: रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, साहेबगंज, दुमका, पाकुड़, जामताड़ा। इसके साथ ही पलामू जिले के सतबरवा ब्लॉक के रबदा और बकोरिया पंचायत, गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी और बोरिजोर ब्लॉक में यह कानून लागू होगा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है, हर माह ग्राम सभा की एक बैठक जरूरी

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