झारखंड में बिना सरना धर्म कोड के ही कराई जाएगी जातीय जनगणना

झारखंड में इस बार भी बिना सरना धर्म कोड के ही जनगणना होगी। भू-राजस्व विभाग एक सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी करेगा। वर्ष 1931 के बाद यह पहला मौका होगा, जब देश में जातीय जनगणना कराई जाएगी। वर्ष 1951 तक सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना होती थी। लेकिन इस बार सभी जातियों की जानकारी जुटाई जाएगी। झारखंड सरकार ने भी जनगणना की तैयारी शुरू कर दी है। चार दिन पहले हुई कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के आधार पर झारखंड में भी अधिसूचना जारी करने की स्वीकृति दी गई है। राज्य सरकार को 31 जुलाई तक ही यह अधिसूचना जारी करनी थी, लेकिन अब इस दिशा में काम शुरू हुआ है। माना जा रहा था कि झारखंड सरकार सरना धर्म कोड के साथ जनगणना कराने का फैसला लेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विधानसभा से प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा गया है : झामुमो, कांग्रेस और राज्य सरकार जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल करने की मांग लंबे समय से कर रही है। विधानसभा से भी यह प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा गया था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को न तो स्वीकृति दी है और न ही अस्वीकृत किया ​है। अब भू-राजस्व विभाग के प्रस्ताव में अधिसूचना के पुन: प्रकाशन की बात लिखी गई है। पहली बार डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी जनगणना इस बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी। इसलिए राज्य में अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले जनगणना एप का टेस्ट शुरू होगा। इस जनगणना में मोबाइल एप, ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार ने 16वीं जनगणना के लिए 26 जून 2025 को भारत के राजपत्र में इसे जारी किया था। इसी आधार पर अब राज्य सरकार पोर्टल पर पूरा प्रोफाइल जारी करेगी। फिर घर की लिस्टिंग होगी और जनगणना के लिए फील्ड स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी। रांची, धनबाद और जमशेदपुर में बढ़ी सबसे अधिक आबादी राज्य में 14 साल में रांची, धनबाद और जमशेदपुर की आबादी सबसे ज्यादा बढ़ी है। रांची में 6.60 लाख, धनबाद में 6.09 लाख और पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में 5.64 लाख आबादी बढ़ी है। वहीं लोहरदगा आबादी बढ़ने के मामले में सबसे पीछे हैं। यहां 14 साल में 1.05 लाख लोग बढ़े। वहीं खूंटी की आबादी 1.21 लाख ओर सिमडेगा की आबादी 1.39 लाख बढ़ी है। अभी झारखंड की अनुमानित आबादी करीब 4.06 करोड़ आमतौर पर हर 10 साल में देश में जनगणना होती है। इस बार कोरोना के कारण 2021 में जनगणना नहीं हो पाई, जो अब 2027 में होगी। विभिन्न तथ्यों के आधार पर केंद्र सरकार ने प्रोजेक्शन रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक झारखंड की आबादी 4.06 करोड़ आंकी गई है। इसमें पुरुषों की आबादी करीब 2.07 करोड़ है। इसके मुताबिक 14 साल में झारखंड की आबादी 76.18 लाख बढ़ी है। वर्ष 2011 की जनगणना में राज्य की कुल आबादी 3.29 करोड़ थी। जनगणना में कब क्या होगा एक माह में जनगणना कर्मियों का प्री टेस्ट होगा। अक्टूबर 2025 में चयनित क्षेत्र में प्री टेस्ट होगा। जनवरी 2026 में जनगणना के सवालों का गजट प्रकाशन होगा। फरवरी से मार्च 2026 तक फील्ड ट्रेनर, सुपरवाइजर और संग्रहकर्ता का प्रशिक्षण होगा। अप्रैल से सितंबर 2026 तक घरों के चयन का क्षेत्रीय कार्य। सितंबर से नवंबर 2026 तक नेशनल और मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण होगा। दिसंबर 2026 में जनगणना पदाधि​कारियों का प्रशिक्षण होगा। एक मार्च 2027 से जनगणना शुरू होगी।

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