झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को गुमला की छह वर्षी बच्ची के गुमशुदगी के मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने सुनवाई के बाद बाल तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाके से बच्चियों को तस्करी करके सऊदी अरब सहित अन्य देश ले जाया जाता है। विदेशों में उनका मानसिक एवं शारीरिक शोषण होता है। ऐसे बच्चियों को बचाने के लिए झारखंड सरकार को सख्त कदम उठाना होगा। ग्रामीण इलाकों और पंचायतों के लोगों को मानव तस्करी करने वाले लोगों के प्रति जागरूक करना होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश पर गृह सचिव वंदना दादेल और आईजी ऑनलाइन उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि दूसरे राज्यों से व्यवसाय के नाम पर झारखंड आने वाले घुमंतू लोगों के लिए सरकार ने क्या गाइडलाइन बनाई है। गृह सचिव ने कहा कि लोगों के मौलिक अधिकार के तहत किसी को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने से रोक नहीं जा सकता। हालांकि, राज्य सरकार ऐसे लोगों के लिए कोई न कोई दिशानिर्देश तय कर सकती है। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई 25 फरवरी निर्धारित करते हुए उस दिन भी गृह सचिव को ऑनलाइन हाजिर रहने को का निर्देश दिया है। अदालत ने गुमला से लापता बच्ची के मामले में गठित एसआइटी की रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में तलब की है।


