झालावाड़ के पीपलोदी पहुंचे नरेश मीणा:मृतक बच्चों को परिजनों को सौंपे 13-13 लाख रुपए, भामाशाहों से इकठ्ठा किए; घायलों को दिए 75 हजार

झालावाड़ जिले के पीपलोदी में हुए हादसे में मृतक बच्चों के परिजनों को नरेश मीणा ने सहायता सौंपी। 25 जुलाई को हुए इस हादसे में जान गंवाने वाले 7 बच्चों के परिजनों को 13-13 लाख रुपए दिए गए। जबकि घायलों को 75-75 हजार रुपए की सहायता राशि सौंपी गई। यह रकम भामाशाहों से मिले कुल 1 करोड़ रुपए में से सौंपी गई। परिजनों को दी सहायता राशि
नरेश मीणा शाम में करीब 4:30 बजे पीपलोदी गांव पहुंचे और सहायता राशि बांटी। इस दौरान छोटूलाल ऐरवाल को उनके दो बच्चों कान्हा और मीना की मृत्यु के कारण 26 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी गई। मृतक कुंदन के पिता बीरामचंद भील, मृतक हरीश के पिता बाबूलाल भील, मृतक पायल के पिता लक्ष्मण भील, मृतक प्रियंका के पिता उधम सिंह भील और मृतक कार्तिक के पिता हरक चंद लोधा को 13-13 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। मीणा ने मंच पर ही बैंक कर्मचारियों द्वारा सभी मृतक बच्चों के परिवारों की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) करवाई। पीएम आवास योजना को लेकर साधा निशाना
इस दौरान नरेश मीणा ने सरकार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान न बनने को लेकर सवाल उठाए। गांव की एक महिला ने बताया कि ग्राम पंचायत के कर्मचारी उनसे पैसे मांगते हैं, जिसके कारण उनके मकान नहीं बन पाए। इस पर मीणा ने सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना की। मीणा ने कहा कि उन्होंने पीपलोदी गांव के लोगों के लिए संघर्ष किया है, जिसमें उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं था। उन्होंने बताया कि इस मामले में वे 40 दिन जेल में रहे और सरकार से मदद के लिए जयपुर में 15 दिन का अनशन भी किया, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। भामाशाहों के सहयोग पैसे इकठ्ठा किए
मीणा ने कहा-जयपुर में धरना प्रदर्शन के दौरान चलाए गए अभियान में भामाशाहों ने आगे आकर सहयोग किया। इसमें मातादीन गुर्जर ने 51 लाख रुपए और अन्य भामाशाहों ने लगभग 49 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की। यह भी पढ़ें राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरी,7 बच्चों की मौत:9 की हालत गंभीर; 5 टीचर सस्पेंड; शिक्षा मंत्री बोले- जिम्मेदार तो मैं ही हूं राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई, वहीं 9 गंभीर घायल हो गए। मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी सरकारी स्कूल की क्लास में शुक्रवार सुबह बच्चे बैठे थे, तभी कमरे की छत ढह गई। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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