रांची सदर अस्पताल में हाई रिस्क गर्भवती महिला का इलाज और बाद में रिम्स में हुई मौत के बाद डॉक्टर की छवि खराब करने के मामले में चिकित्सकों में गहरा रोष है। इस मामले में झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विस एसोसिएशन (झासा) की आपात बैठक की गई, जिसमें चिकित्सकों ने इलाज प्रक्रिया के दौरान सदर अस्पताल और रिम्स द्वारा किए गए प्रयासों को उचित बताते हुए सीएचओ सोनी प्रसाद एवं अन्य पर हंगामा और अस्पताल की छवि खराब करने का आरोप लगाया। बैठक में बताया गया कि बीते 21 जनवरी को हाई रिस्क गर्भवती महिला को परिजनों की सहमति और इनफॉर्म्ड कंसेंट के बाद सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान ही छह यूनिट ब्लड की व्यवस्था की गई और मरीज को एडवांस लाइफ सपोर्ट कार्डियक एम्बुलेंस से वेंटिलेटर व चिकित्सकीय टीम के साथ रिम्स रांची रेफर किया गया। वहां पहले से ट्रॉमा सेंटर आईसीयू में व्यवस्था कर ली गई थी। रिम्स में भी बिना किसी शुल्क के लगातार ब्लड और ब्लड कंपोनेंट उपलब्ध कराए गए, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद तीन दिन बाद मरीज की मौत हो गई। झासा का आरोप है कि इलाज के दौरान और महिला की मौत के बाद सीएचओ सोनी प्रसाद और अन्य 10 सीएचओ द्वारा रिम्स और सदर अस्पताल में लगातार हंगामा किया गया और सोशल मीडिया पर चिकित्सकों व अस्पताल की छवि खराब की गई। झासा ने सिविल सर्जन रांची से मांग की है कि अस्पताल में हंगामा, सरकारी कार्य में बाधा और छवि खराब करने के आरोप में दोषियों पर अविलंब कार्रवाई की जाए। बैठक में डॉ. एस प्रसाद, झासा अध्यक्ष डॉ विमलेश सिंह, सचिव डॉ. ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह, फीमेल विंग की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. मुशरत यामिनी, डॉ आरके सिंह, डॉ एके झा, डॉ रंजू सिन्हा समेत झासा के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।


