झुंझुनूं जिले में परिवहन विभाग के भीतर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। नए वाहनों को नियमों के विरुद्ध जाकर पुराने वीआईपी (VIP) नंबर अलॉट करने के मामले में अब कानूनी शिकंजा कस गया है। वर्तमान जिला परिवहन अधिकारी (DTO) मोनू सिंह मीणा की रिपोर्ट पर कोतवाली पुलिस ने विभाग के दो पूर्व डीटीओ सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाल श्रवण कुमार ने बताया कि DTO की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया गया। मामले की जांच की जाएगी। DTO ऑफिस से दस्तावेज लेकर जांच की जाएगी। क्या है पूरा मामला (बैकलॉग की आड़ में खेल) नियमों के मुताबिक, किसी पुराने वाहन का नंबर तभी सरेंडर या री-इश्यू किया जा सकता है जब उसका प्रॉपर बैकलॉग रिकॉर्ड मौजूद हो। आरोप है कि झुंझुनूं डीटीओ कार्यालय में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर सिस्टम में फर्जी बैकलॉग एंट्रीज कीं। इस प्रक्रिया के जरिए उन ‘पसंदीदा’ या वीआईपी नंबरों को जीवित किया गया जो सालों पहले बंद हो चुके थे और उन्हें अवैध तरीके से नई लग्जरी गाड़ियों को अलॉट कर दिया गया। इनके खिलाफ मामला दर्ज वर्तमान DTO मोनू सिंह मीणा ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के आधार पर संजीव कुमार दलाल: पूर्व डीटीओ (कार्यकाल – फरवरी 2024 तक) मक्खनलाल जांगिड़: पूर्व डीटीओ (कार्यकाल – 27 फरवरी 2024 से 15 अप्रैल 2025 तक)। गजेंद्र सिंह मीणा: अतिरिक्त सहायक अधिकारी (AAO) अभिलाषा: सूचना सहायक। जांच के चौंकाने वाले आंकड़े परिवहन आयुक्त के निर्देश पर हुई इस उच्च स्तरीय जांच में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें सामने आई हैं। दोनों डीटीओ के कार्यकाल के दौरान कुल 659 वाहनों को पुराने वीआईपी नंबर जारी किए गए थे। जांच में पाया गया कि इनमें से 44 वाहनों को पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों और प्रक्रिया के जरिए नंबर दिए गए। विभाग ने संदिग्ध पाए गए वाहनों के मालिकों को नोटिस जारी कर गाड़ी के साथ पेश होने को कहा था। अब तक की जांच में 150 से अधिक वाहन ऐसे मिले हैं जिनमें बैकलॉग भरने में स्पष्ट रूप से हेराफेरी की गई है। गाड़ियों की RC होगी निरस्त DTO मोनू मीणा ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पूर्व डीटीओ मक्खनलाल जांगिड़ को 8 मई को ही सस्पेंड किया जा चुका है। अंतिम नोटिस जारी जिन 150 से अधिक वाहनों का सत्यापन संदिग्ध पाया गया है, उन्हें विभाग द्वारा अंतिम नोटिस भेजा जा रहा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन सभी वाहनों की आरसी (Registration Certificate) निरस्त कर दी जाएगी, जिससे ये वाहन सड़कों पर अवैध हो जाएंगे।


