झारखंड में इस बार टमाटर की बंपर पैदावार हुई, लेकिन गिरते दाम और सरकारी मदद की कमी से किसान भारी नुकसान में हैं। टमाटर की कीमतें 2 से 3 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। कुछ जगहों पर टमाटर एक रुपए किलो बिक रहा है। लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में किसान ट्रांसपोर्टिंग और मजदूरी के खर्च को देखते हुए फसल खेतों में ही छोड़ने को मजबूर हैं। इससे टमाटर सड़ रहे हैं। एक कैरेट (40-50 किलो) टमाटर सिर्फ 30-35 रुपए में बिक रहा है। यह किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। पहले जमशेदपुर के किसान टमाटर को दूसरे राज्यों में भेजकर अच्छा मुनाफा कमाते थे, लेकिन इस बार हालात बदतर हो गए हैं। पटमदा में कोल्ड स्टोरेज की कमी किसानों की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। कोल्ड स्टोरेज होता, तो वे टमाटर को सुरक्षित रखकर बेहतर दाम पा सकते थे। खेतों में ही बर्बाद हो रहे टमाटर
तपन गोराई का कहना है कि उचित दाम नहीं मिलने से टमाटर खेत में ही छोड़ना पड़ रहा है। मजदूरी देना भी मुश्किल हो गया है। सरकार से कोई मदद नहीं मिली। मदन सिंह ने बताया कि टमाटर की कीमतें इतनी गिर गई हैं कि एक रुपये किलो बिक रहा है। मजदूरी तक नहीं निकल रही। खेत में ही टमाटर सड़ रहे हैं। लक्ष्मीकांत मांझी ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज की कमी से किसान फसल सुरक्षित नहीं रख पा रहे। सरकारी मदद मिलती तो परेशानी नहीं होती। बाजार में दाम गिरने से ट्रांसपोर्टिंग का खर्च भी नहीं निकल रहा।


