जिले के टाई गांव में श्मशान भूमि के पास स्थित जोहड़ में भारी मात्रा में सरकारी सैनिटरी नैपकिन लावारिस पड़े मिले हैं। ये वही नैपकिन हैं जिन्हें सरकार ‘उड़ान योजना’ के तहत ग्रामीण महिलाओं और स्कूल जाने वाली बालिकाओं को मुफ्त वितरित करने के लिए भेजती है। खुले में भारी संख्या में नैपकिन फेंके जाने से न केवल सरकारी धन की बर्बादी उजागर हुई है, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। क्या है पूरा मामला? टाई गांव में श्मशान के पास जोहड़ में ग्रामीणों ने बड़ी मात्रा में नैपकिन के पैकेट देखे। ये पैकेट सरकारी सप्लाई के हैं, जिन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से बांटा जाना था। इस संबंध में जब LS (लेडी सुपरवाइजर) मण्डावा, पुष्पा राठौड़ से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि, “हमें वितरण के लिए जो सप्लाई मिलती है, उसे हम वितरित कर देते हैं। लेकिन पिछले करीब एक साल से तो विभाग की ओर से सप्लाई ही नहीं मिली है। ये नैपकिन यहाँ किसने और कब फेंके, इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। क्या है ‘उड़ान योजना’ राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई ‘इंदिरा महिला शक्ति उड़ान योजना’ का उद्देश्य महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।10 से 45 वर्ष की आयु की किशोरियां और महिलाएं निशुल्क वितरित किए जाते है। प्रत्येक लाभार्थी को प्रतिमाह 12 सैनिटरी नैपकिन निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से और छात्राओं को राजकीय शिक्षण संस्थानों (स्कूल/कॉलेज) के माध्यम से वितरित किए जाते हैं।


