ये नजारा भिलाई नगर निगम के डिपो में खड़ी बसों का है। उनके इंजन, खिड़की, टायर-चक्के, दरवाजे चोरी हो गए। ये बसें अब ईंट-पत्थरों के सहारे खड़ी हैं। दरअसल, 2015 में जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण योजना के तहत दुर्ग जिले को 37 करोड़ रुपए से 115 बसें उपलब्ध करानी थीं। 30 लाख रुपए प्रति बस के हिसाब से करीब 20 करोड़ रुपए की 70 बसें भिलाई नगर निगम को मिली भी थीं। इनमें से 57 ही सड़क पर उतर पाईं। बाकी 13 बसों को आज तक परमिट नहीं मिल पाया और वे निगम के डिपो में रखे-रखे ही कबाड़ हो गईं। अब इन नई बसों को कबाड़ में नीलाम करने की तैयारी है। एजेंसी बिना चलाए बस मालिक बनना चाहती थी बसें 2015 में खरीदी गई थी। कुछ साल चली, फिर कोरोना काल में लागडाउन लग गया। एजेंसी ने सभी बसें निगम के डिपो में खड़ी कर दी और काम छोड़ दिया। देख-रेख के अभाव में लोगों ने बसों के इंजन सहित सभी सामान चोरी कर लिए। 2022 में जिस एजेंसी ने काम लिया वह भी बसों का मालिकाना हक मिलने का इंतजार कर रही थी। बसों के मेंटेनेंस की ओर उसने कोई ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे जो बसें चल रही थीं, वह भी कंडम हो गईं। शर्त भी अजीब: शुरुआत में जिस एजेंसी को बस चलाने की जिम्मेदारी दी थी वह 2020 में भाग गई। इसके बाद 2022 में दूसरी एजेंसी को बस चलाने का ठेका दिया गया, इस शर्त पर कि 7 साल तक वह बसों में सुधार कर चलाए। इसके बाद सभी बसें उसी की हो जाएंगी। लेकिन, ठेकेदार सिर्फ 6 ही बसें चला पाया, वह भी कुछ समय बाद धीरे-धीरे बंद हो गईं। डिपो में खड़ी बसों के मूल्यांकन का काम पूरा कर लिया गया है। मुख्य अभियंता अवकाश में है, इसलिए रिपोर्ट मेरे पास नहीं आई है। जब रिपोर्ट आएगी तो उसे कलेक्टर के सामने प्रस्तुत करूंगा।
-राजीव पांडे, आयुक्त भिलाई


