टीकमगढ़ में आरएसएस का हिंदू सम्मेलन:शताब्दी वर्ष में सांस्कृतिक सुरक्षा-संगठन पर जोर; संतों ने कहा- एकता ही हमारी शक्ति

टीकमगढ़ में आरएसएस के स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मंगलवार को ‘हिंदू सम्मेलनों’ का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में जाति और पंथ के भेदभाव को भुलाकर सभी समाजों के लोग और साधु-संत एक जाजम पर नजर आए। उत्सव भवन से लेकर ग्रामीण अंचलों तक आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक मूल्यों को बचाने का संदेश दिया गया। प्रमुख बस्तियों में उमड़ा जनसैलाब जिले के उत्सव भवन, कुंडेश्वर, राजमहल, दरगुवां और कुंवरपुरा में मुख्य सम्मेलन आयोजित किए गए। इसके साथ ही पण्डयाना, भटनागर बस्ती, कुडीला और मलगुंवा में भी भारी संख्या में हिंदू समाज के लोग जुटे। उत्सव भवन के कार्यक्रम में संत बब्लू महाराज, लहरेन सरकार और उत्तम दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। वक्ता प्रीति चतुर्वेदी और मुख्य वक्ता जितेंद्र वर्मा ने समाज के सामने वर्तमान चुनौतियों और संगठन की शक्ति पर अपने विचार रखे। सांस्कृतिक सुरक्षा और संगठन पर जोर कुंडेश्वर में पुजारी जमुना प्रसाद और राजमहल बस्ती में सीताशरण अग्निहोत्री व शालिनी परमार ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू समाज की मजबूती उसकी एकता में ही निहित है। उन्होंने कहा कि अपनी गौरवशाली संस्कृति और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी समाजों का एक संगठित स्वरूप में रहना अनिवार्य है। शताब्दी वर्ष का संकल्प लिया आयोजकों ने बताया कि आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। संतों ने आह्वान किया कि लोग अपने दैनिक जीवन में संस्कारों को अपनाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

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