टीकमगढ़ में रावण दहन समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मुख्य समारोह नजरबाग मैदान में होगा, जहां 35 फीट ऊंचे रावण और 20-20 फीट ऊंचे मेघनाथ व कुंभकरण के पुतले जलाए जाएंगे। हालांकि, लगातार बारिश के कारण खुले में रखे पुतलों को तैयार करने में कारीगरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण पुतले बार-बार गीले होकर खराब हो रहे हैं, जिससे कारीगरों को उन्हें स्टोव से सुखाकर रंग-रोगन करना पड़ रहा है। आज रात 8 बजे तक तीनों पुतलों को तैयार कर नजरबाग मैदान में खड़ा कर दिया जाएगा, जिसके बाद रावण दहन का कार्यक्रम होगा। पुतलों का निर्माण पिछली तीन पीढ़ियों से कर रहे कारीगर शरद कसगर ने बताया कि वे यह काम सिर्फ परंपरा को जीवित रखने के लिए करते हैं, इसमें कोई लाभ नहीं होता। इस वर्ष रावण का पुतला 35 फीट और मेघनाथ व कुंभकरण के पुतले 20-20 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। दो साल पहले रावण 30 फीट और अन्य पुतले 15-15 फीट के थे। शरद कसगर के अनुसार, तीनों पुतलों के निर्माण में 100 से अधिक बांस, कागज और रंग-रोगन का उपयोग होता है। इसके अलावा, पटाखे बाहर से मंगवाए जाते हैं। बांस, कागज और रंग-रोगन पर लगभग 40 हजार रुपये और पटाखों पर 15 से 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस काम में 10 मजदूर भी लगते हैं, जिससे कुल लागत पूरी हो जाती है। इस साल लगातार हो रही बारिश ने कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि पुतले खुले मैदान में बनाए जा रहे हैं और बार-बार भीगने से उन्हें सुखाने में अतिरिक्त समय और मेहनत लग रही है।


