मकर संक्रांति के पर्व पर धातु निर्मित मांझे से होने वाली दुर्घटना को रोकने के लिए टोंक कलेक्टर ने निर्देश जारी किए है। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने लोक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं पशु पक्षियों की जान के खतरे और बिजली सप्लाई को बाधा रहित बनाए रखने के लिए पक्का धागा, नायलॉन, प्लास्टिक मांझा को प्रतिबंधित किया है। साथ ही सिंथेटिक, टॉक्सिक मटेरियल, आयरन पाउडर और ग्लास पाउडर से बने चाइनीज मांझे की थोक व खुदरा बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही उपयोग पर भी रोक के निर्देश दिए है। कलेक्टर ने धातु से निर्मित मांझे पर टोंक जिले की राजस्व सीमा में प्रतिबंधित के आदेश जारी किए हैं। सुबह और शाम को 2 घंटे नहीं होगी पतंगबाजी
कलेक्टर ने बताया कि धातु निर्मित मांझे को प्रतिबंधित किया है। साथ ही पतंगबाजी का समय भी निर्धारित किया है। इसके तहत सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम 5 बजे से शाम 7 बजे की समयावधि में पतंगबाजी पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश 31 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा। आदेश की अवहेलना या उल्लंघन किए जाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 223 के तहत दंडित किया जाएगा। ज्ञात रहे में धातु से निर्मित से पतंगबाजी से कई बार दुर्घटना हो चुकी है। कई जगह तो लोगों के गले की नसे कट चुकी है। इससे मौत तक हो चुकी हैं । इसके अलावा पशु पक्षियों की जान को भी खतरा है। इसे देखते जिला मजिस्ट्रेट कल्पना अग्रवाल ने भी जिले में धातु से निर्मित मांझे के उपयोग, बेचने आदि पर रोक लगा दी है।


