टोंक में मानवाधिकार एसोसिएशन का कार्यकर्ता सम्मेलन:राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले-मानवाधिकार पर सरकार की मंशा में खोट

टोंक जिला मुख्यालय पर बुधवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन का कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ। इसमें देशभर से अतिथि आए। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश सिंह तोमर ने इस मौके पर कहा- 2005 के बाद कर्मचारियों को पेंशन नहीं है। जनप्रतिनिधियों को हर बार की पेंशन मिलती है। हर सांसद और विधायक 15 हजार रुपए रिचार्ज के लिए मिलते हैं। ये कभी नहीं सुधरेंगे। किसी धर्म में नहीं है कि आप अत्याचार करें। सब धर्म मानवता का पाठ पढ़ाते हैं। मानवता को जीवित रखिए। माता-पिता की सेवा करें। माता-पिता ही भगवान हैं। दलितों पर अत्याचार तो अफसरों को आराम से नहीं बैठने देंगे सुरेश सिंह तोमर ने कहा- दलितों पर राजस्थान में ही नहीं, देश में कहीं भी अत्याचार हो रहा है तो वहां के कलेक्टर , SP को आराम से नहीं बैठने देंगे। मोईन खान ने कहा- सबसे बड़ा धर्म लोगों की हेल्प करना है। शिवराज शक्तावत ने कहा- संविधान ने सबको बराबर अधिकार दिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन राजस्थान में कमजोर बैरवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदयाल बैरवा ने कहा- राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन राजस्थान में कमजोर है। इसे मजबूत करने की जरूरत है। इसका कार्ड लेकर जब कोई थाने, प्रशासन के पास जाता है तो कोई वैल्यू नहीं समझता। इसलिए संगठन को मजबूत करें। आज भी SC-ST मुस्लिम समुदाय पर अत्याचार होता है। मूंछ रखने पर मर्डर तक किया जा रहा है। पंजाब से आए बहादुर सिंह ने कहा- इस देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई भाई-भाई हैं। सबको सम्मान दें और लोगों की सेवा करें। पीड़ितों की सहायता करें। रेल लाओ संघर्ष समिति अध्यक्ष अकबर खान ने बताया कि कार्यक्रम में चीफ गेस्ट महाअधिवक्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष एस एस तोमर रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता टोंक के मोइन निजाम ने की। विशिष्ट अतिथि बैरवा महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदयाल बाडोदिया, चाकसू के पूर्व चेयरमैन अब्दुल हमीद खोखर, पूर्व उप सभापति सलीमउद्दीन खांन, निदेशक केआर खान, प्रदेशाध्यक्ष शिवराज सिंह शक्तावत, महिला प्रदेशाध्यक्ष निलिमा सिंह आमेरा,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश आमला, जिला अध्यक्ष डॉ सिताराम विजयवर्गीय, बहादुर सिंह सहित पंजाब हरियाणा, दिल्ली और प्रदेश भर से पदाधिकारी कार्यकर्ता सम्मेलन में उपस्थित हुए। मंच संचालन राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार, राष्ट्रीय शायर ज़िया टोंकी ने किया।

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