टोल खा रहे माफिया:टोल नाकों पर फर्जी रसीदें थमाकर हड़प रहे पैसा, रिकॉर्ड में वाहनों की एंट्री ही नहीं

क्या आप चौपहिया वाहन लेकर नेशनल हाईवे 927-ए और स्टेट हाईवे-32 पर गुजरात व एमपी से सटे राजस्थानी जिलों में आते-जाते हैं? यदि हां, तो तय मानकर चलिए, टोल नाकों पर आपके साथ बड़ा धोखा हो रहा है। उदयपुर, बांसवाड़ा और सलूम्बर जिले में अनेक टोल नाकों पर टोल माफिया ने सरकारी सिस्टम के समानान्तर अपना ही वसूली सिस्टम खड़ा कर रखा है। सरकारी मशीनों के साथ अपनी अलग मशीनें लगा रखी हैं। इनसे फर्जी और आधे-अधूरे गाड़ी नंबर भरकर ऑफलाइन पर्चियां काटकर दे रहे हैं। गुजरात, एमपी या बाहरी जिलों की गाड़ी जैसे ही टोल बूथ पर आती है, टोलकर्मी कहते हैं- ‘आपके फास्टैग में बैलेंस नहीं है। फास्टैग काम नहीं कर रहा। आप कैश दे दो।’ इसके बाद कैश लेकर फर्जी गाड़ी नंबरों की नकली पर्ची थमा देते हैं। पैसा सरकारी खजाने के बजाय अपनी जेब में रख रहे हैं। कई बार तो पहले से काटकर काउंटर पर रखी पर्चियां वाहन चालकों को थमा देते हैं। ऑफलाइन पर्ची काटने पर दोगुना टोल लेने का नियम है, लेकिन नहीं ले रहे। नियमानुसार फास्टैग लिया हुआ है, लेकिन टैग नहीं लगा है ताे भी रजिस्टर्ड वाहन नंबर से ऑनलाइन टोल काट सकते हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं कर रहे। भास्कर की 3 टीमों ने बांसवाड़ा से उदयपुर, रतलाम और दाहोद तक 18 दिन में 4 बार पड़ताल की, चारों बार फर्जीवाड़ा सामने आया। 9 हजार वाहन रोज गुजरते हैं, अपराधी फरार तो ट्रेस नहीं होंगे
जिन तीन नाकों खेराड़, डाकनकोटड़ा और कुंडला पर टोल वसूली में फर्जीवाड़ा सामने आया, वहां से प्रतिदिन औसतन 8 से 9 हजार तक वाहन गुजरते हैं। इनमें 5 से 6 हजार कार-जीप जैसे हल्के वाहन और 3 हजार ट्रक आदि भारी वाहन होते हैं। पर्चियों पर ऐसे नंबर लिखकर दिए जा रहे हैं, जिनकी कोई गाड़ी रजिस्टर्ड ही नहीं है। ऐसे में कोई अपराधी फरार हो जाए तो उसे ट्रेस करना मुश्किल होगा। क्योंकि गाड़ियों की इंट्री ही नहीं की जा रही, जिससे वाहनों का रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं हो रहा। इन टोल प्लाजा पर हो रहा फर्जीवाड़ा एनएच 927-ए : बांसवाड़ा-दानपुर मार्ग पर, बांसवाड़ा के कुंडला टोल प्लाजा पर स्टेट हाइवे-32 : उदयपुर-बांसवाड़ा मार्ग पर उदयपुर जिले के डाकनकोटड़ा टोल तथा सलूम्बर जिले के खेराड़ टोल प्लाजा पर पर्चियां कैश में ऑफलाइन काट रहे, हर बार अलग गाड़ी नंबर 21 नवंबर (डाकनकोटड़ा टोल प्लाजा) भास्कर टीम सुबह 11:05 बजे टोल पर पहुंची। गाड़ी नंबर 23BH7023K था। टोलकर्मी ने कहा- फास्टैग नहीं चल रहा। कैश दे दो। 55 रुपए लिए और एक पर्ची दे दी। उस पर गाड़ी नंबर 4563 लिखा था। न राज्य का कोड और न जिले का।
28 नवंबर (खेराड़ टोल प्लाजा) दोपहर 12:25 बजे। गाड़ी नंबर 7023 था। 55 रुपए लेकर दी पर्ची पर गाड़ी नंबर 7323 लिखा था।
28 नवंबर (डाकनकोटड़ा टोल प्लाजा) : दोपहर 1:20 बजे। पर्ची में गाड़ी नंबर 7023 की जगह 1456 लिखा था। 1 दिसंबर (खेराड़ टोल प्लाजा) दोपहर 3:33 बजे 80 रुपए लिए और पर्ची पर गाड़ी नंबर केवल 0046 लिखा। बहस पर पर्ची ली और दूसरी दे दी। 1 दिसंबर (डाकनकोटड़ा टोल प्लाजा) : दोपहर 2:01 बजे। गाड़ी नंबर GJ38BA0046 था, पर्ची पर 4856 लिख दिया। टोकने पर बोला- पहले बोलना था कि इसी कार की पर्ची चाहिए। बाहर की गाड़ी है, कौन देखता है, आप ताे ले जाओ। ।
8 दिसंबर (कुंडला टोल प्लाजा) : यहां भी वही हाल। गाड़ी नंबर 6849 लिखी पर्ची दे दी।
8 दिसंबर (दानपुर टोल प्लाजा) : गाड़ी पर फास्टैग नहीं था, गाड़ी नंबर से टोल पर्ची बना दी। अधूरी रसीद से उलझ सकते हैं आप, 1033 पर शिकायत करें फास्टैग पूरी तरह से प्री-पेड आधारित सिस्टम है। इसमें माइनस बैलेंस की कोई व्यवस्था नहीं होती है। वाहन चालक के खाते में अगर राशि नहीं हो तो फास्टैग लेन में वाहन को अमान्य माना जाता है। ऐसी स्थिति में टोल एजेंसी नकद, कार्ड या यूपीआई से टोल राशि का भुगतान ले सकती है। लेकिन इसकी सही और पूरी रसीद देना अनिवार्य है। एनएचएआई के नियमानुसार नकद टोल रसीद में वाहन का पूरा रजिस्ट्रेशन नंबर, टोल प्लाजा का नाम, तारीख-समय, राशि, रसीद या मशीन नंबर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। आधी-अधूरी टोल रसीद हो तो संबंधित वाहन चालक भी विवाद में फंस सकता है। इसलिए वाहन चालकों को चाहिए कि रसीद संभालकर रखें। राष्ट्रीय टोल हेल्पलाइन 1033 पर इसकी शिकायत करें। ऐसा है तो गलत है, कार्रवाई की जाएगी “अधूरी रसीद से नकद वसूली में सही एंट्री नहीं होने, एक ही रसीद पर कई वाहनों की एंट्री करने और राजस्व चोरी होने की आशंका रहती है। यदि ऐसा किया जा रहा है तो गलत है, कार्रवाई करेंगे।” -अमित गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, RSRDC, बांसवाड़ा

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