भास्कर न्यूज| अमृतसर ट्रस्ट अफसरों की अनदेखी के कारण जीटी रोड ट्रक स्टैंड स्कीम के तहत 30 साल पहले 30 एससीओ बनाए गए थे। लेकिन 3 कबाड़ की दुकानें खुल जाने पर पुराने वाहनों के पार्ट्स सड़कों पर ही फैला दिए जाने से अवैध कब्जा हो चुका है। जिससे 27 दुकानदारों का कारोबार चौपट हो रहा है। ट्रस्ट स्टैंड ट्रेडर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट परमिंदर सिंह और सेक्रेटरी विशाल मेहता, हरचरन सिंह, सचिन, जसविंदर सिंह, अमनदीप सिंह, सतपाल सिंह ने बताया कि 1995 में जब ये एससीओ बनाए गए थे, तब ट्रस्ट के विज्ञापन में स्पष्ट था कि यहां कबाड़ का काम नहीं होगा। लेकिन बाद में ट्रस्ट के अफसरों की मिलीभगत से दुकानें खुलवा दी गई। बीते 19 सितंबर को लोकल बाडीज मंत्री, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, डायरेक्टर को शिकायत भेज चुके। इसके अलावा बीते 5 अगस्त को इंप्रूवमेंट ट्रस्ट दफ्तर में शिकायत दी थी, जिसका (डायरी नंबर 2947) है। वहीं बीते 15 दिसंबर को चेयरमैन करमजीत सिंह रिंटू से मुलाकात कर समस्या रखी थी। तब उन्होंने 7 दिन का समय मांगा था। लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। ट्रस्ट अफसरों की तरफ से कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। दर्जनों बार आश्वासन मिल चुके पर कबाड़ के दुकानों को हटाया नहीं गया। परमिंदर ने बताया कि (40 से 70) एससीओ बने हैं। कबाड़ सड़कों पर फैला दिए जाने से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एग्रीमेंट चेक करवाएंगे और एक्स-ईएन से रिपोर्ट तलब करेंगे। जिन शर्तों पर दुकानें दी गई उस मुताबिक कोई भी काम नहीं कर रहा तो नोटिस जारी करेंगे। नियम विपरीत काम करते मिलने पर अलॉटमेंट रद्द कर दिया जाएगा। -करमजीत सिंह रिंटू, चेयरमैन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ट्रस्ट की तरफ से ट्रक स्टैंड में बनाए गए 30 एससीओ से करीब 3.40 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट हुआ। लेकिन 30 सालों बाद भी सीवरेज व्यवस्था बदहाल है। बता दें कि 1995-96 में 10 एससीओ बने थे। जिनकी ऑक्शन कराई गई थी। तब तकरीबन 9-9 लाख रुपए में प्रत्येक एससीओ बिका था। इसके बाद 1997-98 तक 10 नए एससीओ फिर बनकर तैयार हुए। तकरीबन 10-10 लाख रुपए में बिके। 1998-99 में 10 एससीओ बनकर तैयार हुए। जिनका ऑक्शन 2002 में कराया गया। प्रत्येक एससीओ लगभग 15-15 लाख रुपए में बिकी थी। जीटी रोड की तरफ सीवरेज की पाईप डाली है लेकिन हौदियां नहीं बनी ना ही मेन लाईन से जोड़ा गया। इंक्रोचमेंट से लोग तंग हो रहे। पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है।


