राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 336 के तहत किए ट्रांसफर को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) नहीं माना जा सकता, क्योंकि डेपुटेशन के लिए कर्मचारी की सहमति अनिवार्य है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप टनेजा की डिवीजन बेंच ने 24 सितंबर को उदयपुर देवली निवासी रवींद्र गुर्जर की स्पेशल अपील स्वीकार करते हुए उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) के कमिश्नर द्वारा 19 मार्च को जारी मूल विभाग में वापसी के आदेश को रद्द कर दिया। दरअसल, रवींद्र गुर्जर लोकल सेल्फ डिपार्टमेंट में असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर-II के पद पर कार्यरत थे। राज्य सरकार ने 20 सितंबर 2023 को आदेश जारी कर उन्हें म्युनिसिपल काउंसिल मकराना से UDA में ट्रांसफर किया, तो गुर्जर ने 10 अक्टूबर को वहां ड्यूटी ज्वाइन की, लेकिन UDA कमिश्नर ने 19 मार्च 2025 को उन्हें कार्यमुक्त कर मूल विभाग में वापस भेज दिया। इसके खिलाफ गुर्जर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे एकलपीठ ने 9 मई को खारिज कर दिया गया। तब कोर्ट ने माना कि यह डेपुटेशन था, इसलिए UDA कमिश्नर को वापस भेजने का अधिकार है। इसके बाद रवींद्र गुर्जर ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। खंडपीठ का फैसला- डेपुटेशन में सहमति जरूरी डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के उमापति चौधरी बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि डेपुटेशन एक सहमति आधारित प्रक्रिया है, जिसमें नियोक्ता और कर्मचारी की सहमति जरूरी है। इसी तरह, हाईकोर्ट ने अपनी को-ऑर्डिनेट बेंच द्वारा डॉ. शंकर लाल बामनिया के मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि ट्रांसफर एक ही कैडर के समतुल्य पदों तक सीमित है, जबकि डेपुटेशन अस्थायी होता है और इसके लिए कर्मचारी की सहमति आवश्यक है। धारा 336 में सहमति का प्रावधान नहीं हाईकोर्ट ने धारा 336(2) का विश्लेषण करते हुए पाया कि इसमें किसी भी पक्ष की सहमति का प्रावधान नहीं है। धारा में केवल ‘ट्रांसफर’ शब्द का प्रयोग है, ‘डेपुटेशन’ शब्द का नहीं। रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि रवींद्र गुर्जर की सहमति ली गई थी, और 20 सितंबर 2023 के ट्रांसफर आदेश में भी डेपुटेशन का उल्लेख नहीं है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि चूंकि लिएन (दावा) मूल नगरपालिका में बनी रहती है, इसलिए यह डेपुटेशन है। केवल राज्य सरकार को ट्रांसफर की शक्ति हाईकोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में धारा 336 और उदयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी एक्ट की धारा 89 की संयुक्त व्याख्या करते हुए कहा कि नगरपालिका से UDA और इसके विपरीत कर्मचारी को ट्रांसफर करने की शक्ति विशेष रूप से राज्य सरकार को दी गई है। चूंकि धारा 336 के तहत ट्रांसफर डेपुटेशन नहीं है, इसलिए पुनः ट्रांसफर की शक्ति भी केवल राज्य सरकार में निहित है। हाईकोर्ट ने UDA कमिश्नर के 19 मार्च के आदेश को कानून के अधिकार के बिना बताते हुए रद्द कर दिया और एकलपीठ के 9 मई के आदेश को भी निरस्त किया। कोर्ट ने UDA कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह मामले को राज्य सरकार को संदर्भित करे और राज्य सरकार को संदर्भ मिलने के 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।


