ट्रायल के बाद गोबर से ईंधन बनाने की योजना बंद, 5 साल में मशीनें हुई कबाड़

भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर कोरिया जिला में ईंधन की समस्या के समाधान और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से गोठानों के माध्यम से गोबर से स्टीक (ईंधन) बनाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। योजना के तहत गोठानों में इकट्‌ठा किए गए गोबर से स्टीक तैयार कर होटल और ढाबों में सप्लाई करनी थी, ताकि वहां चोरी से उपयोग होने वाले कोयले पर रोक लग सके। साथ ही यह सस्ता, टिकाऊ और प्रदूषण रहित विकल्प साबित हो सकता था। यह योजना कागजों और शुरुआती दावों तक ही सीमित रह गई। यहां बता दंे कि तलवापारा स्थित एसएलआरएम में मशीन को स्थापित किया था। यहां काम करने वाली महिला समूह की सदस्यों ने बताया शुरुआत में स्टीक बनाने का काम किया जा रहा था, लेकिन बीते पांच साल से बंद है। कांग्रेस शासन के दौरान गोबर स्टीक बनाने का केवल एक ट्रायल किया, लेकिन उसके बाद योजना को आगे बढ़ाने न तो नियमित उत्पादन शुरू हुआ और ना ही बाजार से जोड़ने की कोई व्यवस्था की गई। नतीजा गोठानों में रखी गई गोबर स्टीक बनाने की मशीनें पिछले पांच वर्षों से यूं ही पड़ी-पड़ी कबाड़ में तब्दील हो गई हैं। जानकारी के अनुसार जिले के कई होटलों और ढाबों में आज भी बड़े पैमाने पर चोरी का कोयला उपयोग किया जाता है, जिससे न केवल राजस्व की हानि होती है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। ऐसे में गोबर से बने स्टीक एक बेहतर विकल्प हो सकते थे। ये स्टीक कोयले की तुलना में सस्ते होते हैं, आसानी से जलते हैं और इनके उपयोग से धुआं व प्रदूषण भी कम फैलता है। इसके बावजूद इस वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने में प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी साफ नजर आती है। यदि समय रहते मशीनों का सही उपयोग किया जाता तो न केवल गोठानों की आय बढ़ती, बल्कि महिला समूहों को रोजगार भी मिलता। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल सकता था।

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