शेयर ट्रेडिंग के नाम पर शहर के एक व्यक्ति से 67 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी हुई। इसमें ब्रोकर ने व्यक्ति को बातों में उलझाकर पहले डीमैट अकाउंट की सारी जानकारी ली। फिर नकली वेबसाइट के स्क्रीनशॉट भेज कर मार्केट में प्रॉफिट की बात कहकर ठगता रहा। विनोद कुमार अग्रवाल की शिकायत पर थाना डिवीजन-8 की पुलिस ने आरोपी ब्रोकर शुभम शर्मा निवासी न्यू सुभाष नगर, बस्ती जोधेवाल पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। जांच अधिकारी लखविंदर मसीह ने बताया कि विनोद कुमार ने डीमैट अकाउंट में शेयर ट्रेडिंग के लिए खुद ही आरोपी से संपर्क किया था। उन्होंने खुद ही अकाउंट की जानकारी साझी की थी। आरोपी ने https://www.angelone.in/ वेबसाइट पर अकाउंट खुलवाया। शुरुआत में आरोपी हर महीने उन्हें प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट भेजता था। एक दिन जब विनोद को रुपयों की जरूरत पड़ी तो उन्होंने आरोपी से रुपए निकालने की बात कही, लेकिन आरोपी टालमटोल करने लगा। इस पर शिकायतकर्ता ने अन्य शेयर ब्रोकर से अकाउंट की जानकारी मांगी तो पता चला कि उनके साथ 67,02,625 की धोखाधड़ी हुई। क्योंकि, आरोपी उनसे हर महीने शेयर में इन्वेस्ट करने के लिए लाखों रुपए लेता रहा। ब्रोकर अगर आपको अन्य अकाउंट में पैसे भेजने को कहता है तो समझें ठगी हो रही है {शेयर ट्रेडिंग के नाम पर धोखाधड़ी कैसे होती है?इस तरह की ठगी उन लोगों के साथ होती है, जिन्हें शेयर मार्किट की ज्यादा जानकारी नहीं होती है। इस तरह की ठगी में व्यक्ति को वॉट्सएप पर एक लिंक भेजकर मोबाइल एप्लीकेशन फोन में डाउनलोड करवा दी जाती है। फिर उसने व्यक्ति को शेयर मार्किट में हो रही अपने अकाउंट से गतिविधियां दिखाई देती है, जोकि पूरी तरफ से गलत होती है। क्योकि, भारत में ऐसे सैकड़ों एप फर्जी चल रहे हैं। इस पर साइबर ठगों का एक समूह नकली डाटा की एंट्री करता है। जिन लोगों को ये भी समझ नहीं आता उनके पास मार्किट प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट भेजे जाते है। इस केस में भी ऐसा ही हुआ है। कैसे पहचान सकते हैं कि ठगी हो रही है? डीमेट अकाउंट बनाते समय व्यक्ति की पूरी वेरिफिकेशन होती है। साथ ही उस बैंक अकाउंट की वेरिफिकेशन होती है, जहां से रुपए इन्वेस्ट होते हैं। इस बैंक अकाउंट की जानकारी डीमेट अकाउंट से जुड़ी होती है। इस बैंक अकाउंट से ही इन्वेस्टमेंट हो सकती है। ऐसे में अगर कोई आपको अपने बैंक अकाउंट में रुपए भेजने की बात कह कर इन्वेस्टमेंट करने को कह रहा है तो समझ जाए कि आपके साथ ठगी हो रही है। क्योंकि, असली ब्रोकर अभी अपने बैंक अकाउंट में रुपए नहीं मांगते। फर्जी एप से कैसे बचा जा सकता है? शेयर मार्किट से संबधित एप प्ले-स्टोर या एप्पल स्टोर से ही डाउनलोड करें। अगर कोई एप्लीकेशन दोनों प्लेटफार्म पर नहीं है तो समझ जाए आप ठगी का शिकार हो रहे हैं। वॉट्सएप पर लिंक भेज कर एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा जाए तो ऐसा मत करें। क्योंकि ऐसे एप नकली होते हैं। किसी भी एप को डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग और रिव्यू भी देख लें। मुकेश चौधरी, साइबर सिक्योरिटी के जानकार


