लुधियाना| विजिलेंस ने एजेंट दीपक, पंकज अरोड़ा, मनीष, ताइसिफ अहमद अंसारी और हनी अरोड़ा को काबू किया। जबकि इस खेल में आरटीओ के मुलाजिम व अन्य एजेंट और भी शामिल हैं। जब विजिलेंस ने रेड की, तब वहां ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर लगे कैमरों की तार निकली हुई थी। विजिलेंस की नजर न पड़े, इसलिए टेस्ट ट्रैक के गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड सीसीटीवी की तार जोड़ने के लिए वहां लगे टावर पर चढ़ गया और वहां से तार जोड़ दी। एजेंटों के नेटवर्क से जुड़े लोगों ने ही बाहर लगे ट्रांसफार्मर की तार को निकालकर लाइट बंद की थी। टेस्ट बिना किसी रुकावट के पास हो जाए, इसके लिए सीसीटीवी कैमरे की तार निकालकर बंद कर दी जाती है। पहले पड़ाव पर ही सेंसर काम करता है। इसके बाद के सभी सेंसर निष्क्रिय कर दिए जाते हैं। फिर व्यक्ति कंप्यूटर के जरिए हर पड़ाव पर पास कर देता है।… आरटीओ दफ्तर के बाहर 8, 6 या 5 हजार में लाइसेंस की गारंटी देते हैं एजेंट केस 1- भास्कर: कितने रुपए में लाइसेंस बन जाएगा।एजेंट: कच्चे और पक्का लाइसेंस बनाने के लिए 7500 रुपए तक खर्च करने पड़ेंगे।भास्कर: कोई काम खराब नहीं होगा, लाइसेंस बन तो जाएगा।एजेंट:काम खराब नहीं होगा, यह मेरी पूरी गारंटी है।भास्कर: कोई लाइसेंस बनाया है।एजेंट: एक महीना पहले बनाया था। दो मैं बना चुका हैं। आरटीओ में रेड… पर सफाई पूरी नहीं; गार्ड लाइसेंस बनाने वाले क्लर्क का काम कर रहा था, बच गया केस 2-भास्कर:प|ी, कुड़ी का लाइसेंस बनाना है।एजेंट:हां बन जाएगा, मेरी सीधी सेंटिंग है।भास्कर:टेस्ट देना पड़ेगाएजेंट: नहीं, सिर्फ फोटो करानी होगीभास्कर: अपना नंबर दे दोएजेंट:नोट करो……..844भास्कर कितने रुपए लगेंगे।एजेंट: लर्निंग लाइसेंस बना है, 4500 दे देना, पक्का लाइसेंस के 7 हजार लगेंगे।भास्कर: कब आना होगा।एजेंट: फोटो होगी, लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। मुझे 32 साल हो गए काम कराते। मेरी रेपुटेशन है शहर में। ताइसिफ 2018 से काम करवाने आ रहा था : ताइसिफ अहमद सेक्टर-32 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर 2018 से काम करवाने के लिए आ रहा है। लाइसेंस बनवाने के भी मोटी रकम वसूलता है। वह लाइसेंस बनवाने के मुंह मांगे पैसे भी देते हैं। अंसारी अकसर ट्रैक पर आता और मुलाजिमों से मिल कर चला जाता था। दीपक 10 हजार तक वसूलता था: दीपक कुमार आरटीओ ऑफिस में प्राइवेट तौर पर चपरासी का काम करता है। काफी लंबा अरसा यहां बीताने के चलते सभी अफसर इसे जानते थे, तो वह हर तरह का काम पकड़ लेता था। हनी अरोड़ा ने जेएमडी ट्रेनिंग स्कूल सेक्टर 32 में ही स्कूल बनाया हुआ है। 8 से 10 हजार तक वसूलता था। पंकज ट्रैक पर काम कर चुका है: पंकज अरोड़ा उर्फ सन्नी स्मार्ट चिप कंपनी से निकाला हुआ मुलाजिम है। वह 2012 से लेकर 2020 तक 3 ट्रैक पर काम कर चुका है। वह टेस्ट पास करवाने के ही लगभग 7 हजार तक वसूलता था। काफी लंबे समय तक इस ट्रैक पर ड्यूटी निभाई है। उसने सेक्टर-32 ट्रैक के बाहर दफ्तर बना लिया। ट्रैक पर सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल: जब विजिलेंस-32 सेक्टर स्थित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर पहुंची तो यहां सिक्योरिटी गार्ड क्लर्क की कुर्सी पर बैठा मिला। कोई आवेदक ट्रैक पर लाइसेंस बनवाने के लिए आता है तो उसे डरा दिया जाता है कि वह फेल हो जाएगा। आवेदक से 500-1000 रुपए तक की डिमांड की जाती है। पैसे देने के बाद गार्ड ट्रैक पर बैठे व्यक्ति को इशारा करता है कि अपना बंदा है बात हो गई है।


