ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर सिस्टम टक्कर की गंभीरता घटाएगा:सिमगा-बिलासपुर हाईवे पर 29 ब्लैकस्पॉट पर लगे ‘सुरक्षा कवच’

रायपुर से बिलासपुर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने बड़ा और अहम कदम उठाया है। बीते एक साल में 231 सड़क दुर्घटनाओं और 86 मौतों के बाद अब इस हाईवे को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हुई है। एनएचएआई ने सिमगा से बिलासपुर के बीच दुर्घटना संभावित 29 ब्लैकस्पॉट पर ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर लगा दिए हैं, ताकि तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहनों से होने वाले जानलेवा हादसों को कम किया जा सके। इसमें कुछ जगहों पर एक तो कहीं दो लगे हैं। इसमें प्रमुख रूप से सिमगा, नारायणपुर, सरगांव, दुलदुला, बाईकोनी, टेमरी, चंद्रपुरी, बैतलपुर, भोजपुरी के पास मनिहारी, बिल्हा, दौराभट्‌ठा, मुढ़ीपार, नांदघाट और हथबंध शामिल है। एक ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर की लागत करीब 3.5 लाख रुपए है। वहीं, दूसरे चरण में रायपुर से सिमगा के बीच भी 18 संवेदनशील स्थानों पर एट्यूनेटर लगाने की योजना बनाई गई है। एनएच-130 पर लगाए गए ये ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर खास तौर पर ओवरब्रिज पर चढ़ने से पहले, सर्विस लेन के कट पॉइंट और डिवाइडर के सामने लगाए गए हैं। ये वही स्थान हैं, जहां बीते महीनों में तेज रफ्तार वाहनों के डिवाइडर, दीवार या पुल के स्ट्रक्चर से टकराने के कई मामले सामने आए थे। अधिकारियों के अनुसार, रात के समय और भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान इन जगहों पर हादसों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। कई बार ड्राइवर की मामूली सी चूक भी जानलेवा साबित हो जाती है। कैसे काम करता है इम्पैक्ट एट्यूनेटर ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर एक तरह का सुरक्षा कुशन होता है। किसी वाहन के इससे टकराने पर यह उसे अचानक रोकने के बजाय धीरे-धीरे उसकी गति कम करता है। यह टक्कर की ऊर्जा को अपने अंदर सोख लेता है, जिससे झटका कम लगता है और वाहन में सवार लोगों को गंभीर चोट लगने की आशंका काफी हद तक घट जाती है। इसे आमतौर पर खतरनाक मोड़ों, पुलों, फ्लाईओवर और डिवाइडर के आगे लगाया जाता है। सर्वे में सामने आई जानकारी प्रोजेक्ट डायरेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि 127 किमी लंबे रायपुर–बिलासपुर हाईवे को लगभग 2600 करोड़ रुपए में निजी कंपनी को सौंपा गया है। इसके बाद पूरे मार्ग का सर्वे किया। सर्वे में सिमगा से बिलासपुर के बीच 29 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए, जिन्हें हादसों के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील माना गया। इसी आधार पर इन जगहों पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. गोवर्धन भट्ट, एनआईटी प्रोफेसर, रायपुर ट्रैफिक इम्पैक्ट एट्यूनेटर हाईवे, फ्लाईओवर, टोल प्लाजा और निर्माण क्षेत्रों में गंभीर हादसों को कम करने में मदद करता है। इसमें क्रशेबल मटेरियल, हाइड्रोलिक सिस्टम और ऊर्जा सोखने वाले बैरियर का उपयोग होता है, जो टक्कर के प्रभाव को कम कर देते हैं। सही स्थान और मानकों के अनुसार लगाए जाने पर यह ड्राइवर, यात्रियों और सड़क कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाता है।

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