ट्रैफिक की भीड़ से सिकुड़ रहा शहर:मास्टर प्लान से पहले मोबिलिटी प्लान, 30 चौराहे सिग्नल फ्री, 25 आरओबी, फ्लाईओवर व 5 एलिवेटेड की जरूरत

मास्टर प्लान 2025 के हिसाब से जयपुर शहर में कनेक्टिविटी यानी सड़कों के जाल पर काम नहीं हुआ। इसी का नतीजा है कि ट्रैफिक लोड बढ़ने से मुख्य सड़कों के साथ-साथ कनेक्टिंग सड़कें भी सिकुड़ती जा रही हैं। हालात यह हैं कि पीक आवर्स के अलावा भी जाम ही जाम रहता है। अब सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि ट्रैफिक पुलिस और आमजन के सुझावों पर जेडीए, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारें। मास्टर प्लान के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का लॉन्ग टर्म प्लान भी बने, जो कागजों में ही सीमित न रहे। बीते 7 साल में दो एलिवेटेड—पानीपेच से झोटवाड़ा और अंबेडकर सर्किल से सोडाला—और दो सिग्नल फ्री—लक्ष्मी मंदिर और बी-2 बाइपास—प्रोजेक्ट बनने के बाद इन सड़कों पर काफी हद तक जाम से राहत मिली है। जेडीए को राइट्स लिमिटेड ने भी शहर को जाम-फ्री करने के लिए लॉन्ग कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी ड्राफ्ट में 25 जगह ग्रेड सेपरेटर (फ्लाईओवर/अंडरपास), एलिवेटेड रोड और रेलवे क्रॉसिंग पर 10 नए आरओबी, आरयूबी की जरूरत बताई है। मास्टर प्लान 2025 के अनुसार 70% कनेक्टिंग सड़कें बनी ही नहीं, जो बनीं उन पर ट्रैफिक का भार बढ़ा इन सड़कों पर एलिवेटेड की जरूरत 35 से 40 लाख वर्गमीटर लंबी सड़कों की जरूरत 13 रेलवे क्रॉसिंग, यहां आरओबी-आरयूबी बनें

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