ट्रैफिक व्यवस्था में 600 होमगार्ड व जिला बल के 350 जवान तैनात, फिर भी रोज लग रहा जाम

जाम… जाम… जाम। शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहन सवार जाम से परेशान हैं। ट्रैफिक स्मूथ करने का हवाला देकर 600 होमगार्ड जवान तैनात किए गए। 4 नए ट्रैफिक थानों का भी सृजन किया गया। इसके बावजूद सामान्य वाहन सवार को इसका फायदा नहीं मिल रहा। सप्ताह की शुरुआत ही जाम के बीच सफर से होती है। सभी प्रमुख सड़कों पर सोमवार की सुबह से ही जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। तीन किमी. की दूरी तय करने में 25-35 मिनट का समय लगता है। जाम में फंसे वाहन सवारों को ट्रैफिक पुलिस भी देखते हैं, लेकिन वे कुछ नहीं कर पाते। काफी मशक्कत के बाद जाम में फंसे वाहन सवार किसी तरह अपने गंतव्य तक पहुंच पाते हैं। हालांकि माननीयों को इस जाम से कोई खास फर्क नहीं पड़ता। वीवीआईपी मूवमेंट की जानकारी मिलते ही पूरा पुलिस महकमा रेस हो जाता है। ट्रैफिक में तैनात जवान का टारगेट ही सिर्फ स्मूथ वीवीआईपी मूवमेंट कराना आैर चालान काटना है। वीवीआईपी मूवमेंट खत्म होते ही ट्रैफिक व्यवस्था में तैनात जवान सुस्त पड़ जाते हैं। यदि किसी दिन अपनी मांगों को लेकर लोग विरोध-प्रदर्शन करने शहर पहुंचे, तो पूरी ट्रैफिक व्यवस्था ही ध्वस्त हो जाती है। क्योंकि इसकी पहले से कोई तैयारी नहीं रहती। फुटपाथ का अतिक्रमण भी जाम का बड़ा कारण, पर ठोस समाधान नहीं किया गया फुटपाथ पर दुकान लगाए जाने से भी सड़क संकरी हो जाती है। यह जाम का सबसे बड़ा कारण है। इसे हटाना भी ट्रैफिक पुलिस को ही है। लेकिन आज तक फुटपाथ वेंडरों को सड़क से हटाने के तमाम प्रयास बेकार साबित हुआ है। शहर को जाम मुक्त रखना है तो इसका ठोस समाधान खोजना होगा। कानून और कड़े करने होंगे। क्योंकि सिर्फ सामान जब्त कर लेने से कुछ नहीं हो रहा। वे दोबारा सामान लाकर सड़क किनारे फिर से दुकान लगा लेते हैं। सुबह हटाया जाता है, शाम को फिर दुकान सज जाती है। इसमें वसूली के खेल से भी इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि अतिक्रमण हटाने की सूचना फुटपाथ दुकानदारों तक पहले ही पहुंच जाती है। स्कूल बस का समय मेंटेन करना चुनौती, एंबुलेंस चालक भी होते हैं परेशान शहर के िवभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों को लेकर स्कूली बसें भी प्रमुख सड़क से ही पहुंचती हैं। ऐसे में जाम की वजह से स्कूली बसें भी फंस जाती है। हालांकि निर्धारित समय पर िवद्यार्थियों को स्कूल पहुंचाना आैर छुट्टी के समय घर तक छोड़ना बस चालक के लिए बड़ी चुनौती है। जाम में फंसने के बाद स्कूली बच्चे भी काफी परेशान रहते हैं। अक्सर स्कूल में छुट्टी के बाद उनको घर के स्टॉपेज तक पहुंचने में देर होती है। वहां इंतजार कर रहे अभिभावक परेशान रहते हैं। वहीं एंबुलेंस चालक को भी काफी परेशनियों का सामना करना पड़ता है। मरीज लेकर आने-जाने वाले एंबुलेंस भी कई बार जाम में फंस जाती हैं, लेकिन आगे जाने का उसे रास्ता नहीं मिल पाता। जाम से निबटने में पूरा सिस्टम लगा हुआ है, लेकिन सामान्य वाहन सवारों को जाम से निजात नहीं मिल पा रही है। ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए हर कदम उठाएंगे अलबर्ट एक्क चौक के पास आधी सड़क पर फुटपाथ दुकानदारों का कब्जा। फाइल फोटो जाम के प्रमुख चार कारण… वीवीआईपी मूवमेंट की सूचना आैर वाहनों का लोड बढ़ते ही हरमू रोड पर विभिन्न जगहों में अचानक सभी कट बंद कर दिए जाते हैं। किशोरगंज चौक पर कट बंद किए जाने के बाद गाड़ीखाना, शनि मंदिर आैर गौशाला कटिंग पर वाहनों का लोड बढ़ जाता है। इन कट को भी बंद करना पड़ता है। ऐसे में गलियों से निकलने वाले वाहन सवारों की परेशानी बढ़ जाती है। भीड़ के कारण वाहन सवार यू-टर्न भी नहीं ले पाते। इससे विवाद होता है। अचानक बंद कर देते हैं कट, यू-टर्न पर होता है विवाद ये चार प्रमुख मार्ग… जहां जाम से होती है सबसे ज्यादा परेशानी 1. न्यू मार्केट चौक से शनि मंदिर होते हुए गाड़ीखाना के रास्ते हरमू मोड़ तक। 2. अलबर्ट एक्का चौक से सर्जना चौक होते हुए एकरा मस्जिद तक। 3. कचहरी चौक से जेल मोड़ होते हुए लालपुर चौक तक। 4. सेंट्रल एकेडमी से मेडिकल चौक होते हुए बरियातू थाने तक। 4. ट्रैफिक पुलिस का मिसमैनेजमेंट 3. अचानक ट्रैफिक रूट डायवर्ट करना 2. सड़क किनारे नो पार्किंग जोन में गाड़ियां खड़ी रहना 1. वाहनों का अचानक लोड बढ़ जाना

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